20 बच्चे दबे...राजस्थान के कोटा में भरभराकर गिरी इमारत, इलाके में मच गई चीख-पुकार, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

कोटा के जवाहर नगर इलाके में एक निर्माणाधीन दो मंजिला इमारत गिर गई, जिसमें एक रेस्टोरेंट भी संचालित हो रहा था. मलबे में कई लोगों के दबे होने की खबर है. पुलिस और प्रशासन की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्रेन की देरी के कारण बचाव कार्य में देरी हुई.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

कोटा : राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा के जवाहर नगर इलाके में शनिवार की रात एक भयावह मंजर देखने को मिला. इंदिरा विहार स्थित एक निर्माणाधीन दो मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. इस इमारत में एक रेस्टोरेंट भी संचालित हो रहा था, जिसके कारण मलबे में कई लोगों के दबे होने की खबर है. घटना के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई. पुलिस और प्रशासन की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं, जबकि स्थानीय लोग भी मदद के लिए बड़ी संख्या में आगे आए हैं.

रात 8:45 बजे हुआ हादसे, मची अफरा-तफरी

आपको बता दें कि यह हादसा शनिवार रात करीब 8:45 बजे का समय था जब यह हृदयविदारक घटना घटी. शांत माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया जब दो मंजिला ढांचा अचानक जमींदोज हो गया. स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मलबे में करीब 20 बच्चों के दबे होने की भयावह आशंका जताई जा रही है. दो बच्चों को गंभीर स्थिति में तुरंत अस्पताल ले जाया गया है. मलबे से बाहर निकलने की गुहार लगाती आवाजें सुनकर वहां मौजूद लोगों के हाथ-पांव फूल गए और आनन-फानन में बचाव कार्य शुरू किया गया.

ऊपरी मंजिलों का निर्माण कार्य चल रहा था

यह इमारत पूरी तरह तैयार नहीं थी और इस पर ऊपरी मंजिलों का निर्माण कार्य चल रहा था. चौंकाने वाला तथ्य यह है कि निर्माणाधीन होने के बावजूद, यहां एक रेस्टोरेंट का संचालन खुलेआम हो रहा था. हादसे के समय रेस्टोरेंट के भीतर करीब 10 से 12 कर्मचारी अपनी ड्यूटी कर रहे थे और कई ग्राहक भोजन का आनंद ले रहे थे. जैसे ही इमारत गिरी, कोई भी सुरक्षित बाहर नहीं निकल सका. इस प्रशासनिक और निर्माण संबंधी लापरवाही ने कई मासूम जिंदगियों को दांव पर लगा दिया है.

क्रेन आने में हुई देरी, स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

राहत और बचाव कार्य में हुई देरी ने घटनास्थल पर मौजूद भीड़ के गुस्से को और भड़का दिया. लोगों का आरोप है कि मलबे को हटाने के लिए जिस भारी क्रेन की तत्काल आवश्यकता थी, वह सूचना मिलने के लगभग डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंची. इस बीच, स्थानीय युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर खुद ही बचाव कार्य शुरू किया और करीब 5-6 घायलों को बाहर निकाला. लोगों का कहना है कि यदि मशीनरी समय पर आ जाती, तो बचाव कार्य की गति काफी तेज हो सकती थी.

पुलिस का रेस्क्यू मिशन ऑपरेशन जारी 

हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए. पूरे इंदिरा विहार क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया है और आम जनता के लिए रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं. पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपदा राहत दल के जवान मलबे के विशाल ढेर को हटाने में जुटे हैं. रेस्क्यू टीमों का प्राथमिक उद्देश्य मलबे में दबे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है. मेडिकल कॉलेज की एंबुलेंस भी वहां मुस्तैद खड़ी हैं ताकि घायलों को तत्काल मदद मिल सके.

आगे की कार्रवाई जारी 

फिलहाल पूरा ध्यान जिंदगियां बचाने पर केंद्रित है, लेकिन प्रशासन ने इस मामले की गहन जांच के आदेश भी दिए हैं. निर्माणाधीन इमारत में व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति कैसे मिली, यह एक बड़ा सवाल बनकर उभरा है. घायलों का उपचार कोटा के मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जहां कुछ की हालत चिंताजनक बनी हुई है. मलबे के नीचे अभी कितने लोग और दबे हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन बचाव दल रात भर अपना अभियान जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है.

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