अब नहीं चाहिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा? सोनम वांगचुक की मांगों की सूची से गायब हुआ नाम

सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन खत्म करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि अनशन तोड़ने के लिए उनके द्वारा रखी गई तीन नई शर्तों में से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी तरह से नदारद है. 

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: देश में हाल ही में हुए NEET परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की कथित विफलताओं को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन एक नए मोड़ पर आ गया है. पिछले 23 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन खत्म करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि अनशन तोड़ने के लिए उनके द्वारा रखी गई तीन नई शर्तों में से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी तरह से नदारद है. 

शर्तों की नई सूची से गायब हुआ 'इस्तीफा' 

जंतर-मंतर पर 20 जून से शुरू हुए इस आंदोलन में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और खुद सोनम वांगचुक की सबसे प्रमुख और शुरुआती मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही थी. खुद वांगचुक कई मंचों से खुलकर शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की बात कह चुके थे. लेकिन 19 जुलाई को अस्पताल के बिस्तर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी उनके हाथ से लिखे नोट ने सभी को हैरान कर दिया है. सोनम वांगचुक ने स्पष्ट लिखा है कि यदि सरकार उनकी तीन विशिष्ट शर्तों को स्वीकार कर लेती है, तो वह तुरंत अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर देंगे. इन शर्तों में सीधे तौर पर किसी इस्तीफे का जिक्र न होना इस समय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. 

क्या हैं सोनम वांगचुक की 3 प्रमुख शर्तें? 

वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए सरकार और विपक्ष के सामने निम्नलिखित तीन शर्तें रखी हैं.

पहली शर्त 

  • केंद्र सरकार देश में हाल ही में हुए विभिन्न पेपर लीक मामलों और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में आई रणनीतिक कमियों व नाकामियों की नैतिक जिम्मेदारी पूरी तरह से स्वीकार करे. 

दूसरी शर्त 

  • सोनम वांगचुक और CJP के नेतृत्व को देश की संसद तक शांतिपूर्ण ढंग से पहुंचने की अनुमति दी जाए. वहां सांसद और वरिष्ठ नेता उन्हें यह लिखित या मौखिक आश्वासन दें कि वे आगामी मानसून सत्र के दौरान शिक्षा और छात्रों के इन गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे. 

तीसरी शर्त 

  • देश की किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी के शीर्ष स्तर के नेता खुद अस्पताल में आकर उनसे मुलाकात करें और उनकी मांगों को पूरा करने का एक ठोस आश्वासन प्रदान करें. 

कॉकरोच जनता पार्टी ने दी सफाई 

शर्तों में अचानक आए इस बदलाव और शिक्षा मंत्री के नाम पर चुप्पी को लेकर जब सवाल उठने लगे, तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की. CJP का कहना है कि सरकार से उनकी मुख्य मांगों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. संगठन ने अपने बयान में कहा, हम पेपर लीक और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले 20 से अधिक पीड़ित छात्रों की मौत के मामले में धर्मेंद्र प्रधान से सीधे तौर पर जवाबदेही तय करने की मांग पर अडिग हैं. इसके साथ ही पीड़ित परिवारों के लिए 1-1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी है. 

जंतर-मंतर से अस्पताल तक का घटनाक्रम

गौरतलब है कि बीते शनिवार को 59 वर्षीय सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से बलपूर्वक हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया था. वांगचुक के समर्थकों और संगठन का आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध एक तरह से हिरासत में रखा गया है. दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए एक आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की गंभीर सलाह और उच्च न्यायालय के पिछले आदेशों का पालन करते हुए वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य की आवश्यक मेडिकल देखभाल सुनिश्चित करने के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती किया है.

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