नई दिल्ली: भारत के चंद्र मिशन को एक और बड़ी वैज्ञानिक सफलता मिली है. इसरो के चंद्रयान-2 मिशन से प्राप्त आंकड़ों के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मौजूद कुछ गहरे गड्ढों के नीचे जल-बर्फ के मजबूत संकेत मिलने का दावा किया है. यह खोज चंद्रमा पर भविष्य में मानव मिशनों और वहां स्थायी आधार बनाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
वैज्ञानिकों ने यह जानकारी चंद्रयान-2 ऑर्बिटर में लगे अत्याधुनिक ड्यूल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (DFSAR) की मदद से हासिल की. यह उपकरण माइक्रोवेव इमेजिंग तकनीक के जरिए चंद्रमा की सतह और उसके नीचे की परतों का अध्ययन करता है. खास बात यह है कि यह रडार एल-बैंड और एस-बैंड दोनों फ्रीक्वेंसी पर काम करता है और इसे चंद्रमा के लिए भेजा गया पहला पूर्ण पोलारिमेट्रिक सिंथेटिक एपर्चर रडार माना जाता है.
अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया, जहां कभी सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती. इन स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्रों का तापमान बेहद कम रहता है और कई जगह यह माइनस 248 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ऐसी परिस्थितियां अरबों वर्षों तक बर्फ को सुरक्षित रखने के लिए अनुकूल मानी जाती हैं.
शोधकर्ताओं ने उन्नत रडार तकनीक का उपयोग करते हुए चार ऐसे गड्ढों की पहचान की, जहां भूमिगत बर्फ मौजूद होने की संभावना काफी मजबूत दिखाई दी. वैज्ञानिकों ने रडार से प्राप्त संकेतों के आधार पर बर्फ और चट्टानी सतह के बीच अंतर करने की नई विधि भी विकसित की. अध्ययन के दौरान “फाउस्टिनी क्रेटर” नामक एक क्षेत्र सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण पाया गया, जहां बर्फीले भंडार के सबसे मजबूत संकेत मिले.
विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रमा पर मौजूद जल भविष्य में मानव मिशनों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है. इससे पीने का पानी, ऑक्सीजन और यहां तक कि रॉकेट ईंधन भी तैयार किया जा सकता है. इसी वजह से चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
भारत का Chandrayaan-3 मिशन पहले ही दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग कर इतिहास रच चुका है. अब चंद्रयान-2 से मिली यह नई जानकारी चंद्रमा पर जल-बर्फ की मौजूदगी को समझने में भारत की वैज्ञानिक क्षमता को और मजबूत करती है. यह उपलब्धि इस बात का भी प्रमाण है कि 2019 में लॉन्च हुआ चंद्रयान-2 ऑर्बिटर आज भी लगातार महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध करा रहा है. First Updated : Wednesday, 27 May 2026