सुप्रीम कोर्ट ने CBI को दी खुली छूट, अब डिजिटल गिरफ्तारी ठगी में बैंक भी घेरे में

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में हो रहे डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़े सभी फ्रॉड मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी बैंकों की भूमिका भी देखे, क्योंकि लोगों से धोखे से करोड़ों रुपये वसूले गए हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

New Delhi: डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर देशभर में हजारों लोग ठगी का शिकार हुए। ठग कभी खुद को पुलिस अधिकारी बताते, कभी कमिश्नर, तो कभी सीबीआई या ईडी के अधिकारी बनकर धमकाते। लोगों को कहा जाता कि अभी उसी समय डिजिटल तरीके से गिरफ्तारी होगी, और इस डर में वे तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते। कई मामलों में रकम लाखों से बढ़कर करोड़ों तक पहुंची। शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई की गति बेहद धीमी रही।

क्या सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है?

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़े सभी मामलों की अब सीबीआई जांच करेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि एजेंसी किसी भी राज्य में जाकर केस दर्ज कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए पूरी स्वतंत्रता दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब साइबर ठगी के केस तेजी से बढ़ रहे हैं।

क्या बैंक भी जिम्मेदार साबित हो सकते हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सीबीआई बैंकों की भूमिका भी जांचे। कई मामलों में ठगों ने ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया जिनकी पूरी जांच नहीं हुई थी। अदालत को शक है कि बैंकिंग सिस्टम में भी कहीं लापरवाही हुई है। अब सीबीआई यह देखेगी कि क्या बैंक समय पर संदिग्ध लेनदेन रोक सकते थे।

क्या लोगों की शिकायतें अनसुनी होती रहीं?

ठगी के शिकार कई लोगों ने बताया कि शिकायत के बाद भी उन्हें तुरंत मदद नहीं मिली। कुछ को थाने जाकर घंटों बैठना पड़ा। कई मामलों में पुलिस ने कहा कि केस दूसरे राज्य का है। इसी वजह से शिकायतें दबती रहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कोई भी केस बिना कार्रवाई के नहीं रहना चाहिए।

क्या अब साइबर ठगी पर लगाम लगेगी?

सीबीआई के जांच हाथ में आने से उम्मीद है कि ठगों को पकड़ना आसान होगा। अदालत ने कहा कि एजेंसी चाहे तो विदेश में बैठकर ठगी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है। अब जांच में साइबर विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। इससे डिजिटल अपराध रोकने में मदद मिलेगी।

क्या अब जनता को मिल सकेगा इंसाफ?

कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ितों में उम्मीद जगी है कि अब उन्हें न्याय मिलेगा। आदेश के बाद सीबीआई जल्दी जांच शुरू करेगी। अदालत ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सरकार से भी कहा गया कि साइबर सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाएं। उम्मीद है कि आगे ऐसे फ्रॉड कम होंगे।

क्या ऑनलाइन भुगतान में सावधानी जरूरी है?

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कॉल पर डरकर पैसे भेजना गलत है। किसी अधिकारी की धमकी आए तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करें। बैंक खाते की जानकारी किसी के साथ साझा न करें। मोबाइल लिंक पर क्लिक करने से पहले अच्छी तरह जांचें।

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