तेजस की फिर उड़ान लेकिन हादसों के साए में HAL पर उठे बड़े सवाल

तेजस फाइटर जेट एक बार फिर उड़ान के लिए तैयार है लेकिन हाल के हादसों ने इसके भरोसे और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं और बहस तेज हो गई है।

calender

भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस एक बार फिर उड़ान के लिए तैयार है। यह खबर रक्षा हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल के हादसों के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं। क्या यह विमान अब पूरी तरह सुरक्षित है। क्या यह वायुसेना की जरूरतों पर खरा उतरेगा। सरकार और HAL का दावा है कि सारी खामियां दूर कर ली गई हैं। लेकिन जमीन पर भरोसा बनना अभी बाकी है।

हादसों ने क्यों बढ़ाई चिंता

तेजस से जुड़े हादसों ने इस प्रोजेक्ट की छवि को नुकसान पहुंचाया है। फरवरी में एक ट्रेनिंग मिशन के दौरान हार्ड लैंडिंग हुई थी। पायलट को इजेक्ट करना पड़ा और विमान को भारी नुकसान हुआ। इससे पहले भी दो बड़े हादसे सामने आए थे। इन घटनाओं ने लगातार सवाल खड़े किए हैं। क्या तकनीकी कमी है या ऑपरेशन में समस्या है। यही चर्चा अब हर जगह हो रही है।

क्या सिस्टम में कोई बड़ी खामी

कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि डिजाइन में बड़ी समस्या नहीं है। उनका कहना है कि हादसे अलग-अलग वजहों से हुए। 2024 में इंजन से जुड़ी समस्या सामने आई थी। दुबई एयर शो में हुआ हादसा हाई रिस्क फ्लाइट का नतीजा था। फरवरी वाली घटना की जांच अभी जारी है। यानी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन संदेह बना हुआ है।

क्यों रुका था पूरा बेड़ा

लगातार घटनाओं के बाद पूरे तेजस बेड़े को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। यह फैसला सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया। करीब 34 विमान ग्राउंड कर दिए गए थे। अब दो महीने बाद इन्हें फिर उड़ाने की तैयारी है। HAL का कहना है कि सभी जरूरी सुधार किए जा चुके हैं। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी।

क्या वायुसेना के पास विकल्प कम

भारतीय वायुसेना पहले से ही फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी झेल रही है। MiG-21 के रिटायर होने के बाद यह समस्या और बढ़ गई है। तेजस से उम्मीद थी कि यह कमी पूरी करेगा। लेकिन देरी और हादसों ने चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल स्क्वॉड्रन की संख्या जरूरत से कम है। ऐसे में तेजस की भूमिका और भी अहम हो जाती है।

देरी का सबसे बड़ा कारण क्या

तेजस प्रोग्राम में देरी की एक बड़ी वजह इंजन सप्लाई रही है। अमेरिकी कंपनी GE से इंजन समय पर नहीं मिल पाए। इससे प्रोडक्शन की रफ्तार धीमी हो गई। HAL को जुर्माना भी लगाना पड़ा। अब धीरे-धीरे सप्लाई शुरू हुई है। लेकिन खोया हुआ समय वापस लाना आसान नहीं है।

आगे का रास्ता कितना मुश्किल

अब तेजस को कड़े टेस्ट से गुजरना होगा। वायुसेना की तकनीकी टीम हर पहलू की जांच करेगी। टेस्ट पायलट इसकी उड़ान भरेंगे। इसके बाद ही अंतिम मंजूरी मिलेगी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो डिलीवरी शुरू होगी। लेकिन असली चुनौती भरोसा वापस जीतने की है। यही इस प्रोजेक्ट की असली परीक्षा होगी। First Updated : Tuesday, 07 April 2026