दिल्ली NEET विरोध प्रदर्शन विवाद, छात्रों पर पेलेट गन और बल प्रयोग के आरोपों की जांच में जुटी RAF

दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग करने, लाठीचार्ज और कथित तौर पर पेलेट गन चलाने के गंभीर आरोपों के बाद रैपिड एक्शन फोर्स ने एक प्रारंभिक सत्यापन जांच शुरू कर दी है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है. दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग करने, लाठीचार्ज करने और कथित तौर पर पेलेट गन चलाने के गंभीर आरोपों के बाद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने एक प्रारंभिक सत्यापन जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों ने शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की.

CRPF ने दिए पड़ताल के निर्देश

अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपने विशेष दंगा-रोधी बल RAF के महानिरीक्षक (IG) को दिल्ली में हुए घटनाक्रम के पूरे क्रम की जांच करने के निर्देश दिए हैं. इसमें प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के साथ-साथ उन घटनाओं की भी पड़ताल की जाएगी जिनमें पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया था. CRPF के शीर्ष अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक औपचारिक ‘कोर्ट ऑफ इंकवायरी’ (CoI) का आदेश नहीं दिया गया है. प्राथमिक जांच में तथ्य स्थापित होने के बाद ही आगे की दंडात्मक या प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

'चलो संसद' मार्च से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले आयोजित 'चलो संसद' मार्च से हुई. जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें नीली वर्दी में RAF के जवान लाठीचार्ज करते, लाठियां चलाते और हथियार संभाले नजर आए.

बल के अधिकारियों ने क्या कहा

बल के अधिकारियों ने कहा कि उन वीडियो फुटेज की भी गहन समीक्षा की जा रही है, जिनमें प्रदर्शनकारियों द्वारा RAF जवानों को घेरकर उनसे मारपीट करते देखा गया है. इसके अतिरिक्त, एक अधिकारी द्वारा प्रदर्शनकारी को पैर मारकर गिराने और शॉक-एमिटिंग उपकरण के इस्तेमाल से जुड़े वीडियो की भी जांच जारी है.

SOP और पेलेट गन के नियम

CRPF के वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि RAF के दंगा-रोधी उपकरणों में 12-बोर की पंप-एक्शन पेलेट गन शामिल होती है. हालांकि, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत इसका इस्तेमाल केवल अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में ही किया जा सकता है. जब जवानों के जीवन को सीधा खतरा हो. SOP के अनुसार, पेलेट गन में डिफ्लेक्टर का उपयोग अनिवार्य है ताकि छर्रे कमर के नीचे ही लगें और चोटें सीमित रहें.

छात्रों को कराया गया अस्पताल में भर्ती

फिलहाल, 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद पेलेट की चोटों के कारण कम से कम दो छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की खबर है. दिल्ली पुलिस ने अपने पास पेलेट गन होने से इनकार किया है, जबकि CRPF या RAF ने आधिकारिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया है कि उनके जवानों ने गोलीबारी की थी.

सोशल मीडिया दिशानिर्देशों का उल्लंघन

बढ़ते विवाद को देखते हुए CRPF ने RAF और अन्य तैनात इकाइयों के कमांडरों को मीडिया से बात न करने के सख्त निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही, RAF की सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत द्वारा इंस्टाग्राम पर की गई पोस्ट की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने CRPF की 2023 की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन किया है या नहीं, जो विवादित विषयों पर टिप्पणी करने से रोकती है.

राहुल गांधी ने घायल छात्र को मीडिया के सामने पेश किया

इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक घायल प्रदर्शनकारी छात्र को मीडिया के सामने लाकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. राहुल गांधी ने दावा किया कि शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहे इस छात्र को पेलेट गन से निशाना बनाया गया, जिससे उसकी एक आंख की रोशनी चली गई है.

युवा की आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा

राहुल गांधी ने कहा, सरकार दावा कर रही है कि पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन इस युवा की आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा है. हजारों युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया और पेलेट गन चलाई गई.' उन्होंने कहा कि यह छात्र पहले पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल हुआ था, लेकिन उसका पेपर लीक हो गया था, और अब न्याय मांगने पर उसे इस तरह की प्रताड़ना सहनी पड़ रही है.

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