टीएमसी नेता जहांगीर खान 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजे गए

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत ने उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत ने उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया. उनकी गिरफ्तारी सोमवार देर रात हुई थी, जबकि मंगलवार को स्थानीय अदालत में पेश किए जाने के बाद पुलिस को पूछताछ के लिए रिमांड मिल गया.

टीएमसी के प्रभावशाली नेता हैं जहांगीर खान 

जहांगीर खान उत्तर 24 परगना जिले में टीएमसी के एक प्रभावशाली स्थानीय नेता माने जाते हैं और क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार बताया जाता है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उनकी गिरफ्तारी एक गंभीर शिकायत के आधार पर की गई है, जिसकी जांच फिलहाल जारी है. हालांकि जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच का दायरा कथित वित्तीय अनियमितताओं और कुछ आपराधिक गतिविधियों से संभावित संबंधों तक फैला हुआ है.

मंगलवार को अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस ने खान से विस्तृत पूछताछ की आवश्यकता बताई. इसके बाद अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया. जांच एजेंसियों का मानना है कि इस अवधि में पूछताछ से मामले के कई अहम पहलुओं पर जानकारी मिल सकती है और अन्य संभावित लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है.

गिरफ्तारी के बाद टीएमसी नेतृत्व ने फिलहाल सावधानीपूर्ण रुख अपनाया है. पार्टी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष नेतृत्व पूरे मामले की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और तथ्यों की समीक्षा के बाद ही कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी जाएगी. वहीं, पार्टी के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई पर आश्चर्य जताते हुए जहांगीर खान को जमीनी स्तर पर सक्रिय और समर्पित नेता बताया है.

विपक्षी दलों का राज्य सरकार और टीएमसी पर निशाना

दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और टीएमसी पर निशाना साधा है. भाजपा और माकपा नेताओं ने गिरफ्तारी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. भाजपा का आरोप है कि यह मामला सत्तारूढ़ दल के भीतर व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और सत्ता संरचना की खामियों को उजागर करता है. विपक्ष का यह भी कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए.

पुलिस ने फिलहाल जांच की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए ज्यादा जानकारी साझा करने से परहेज किया है. हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि रिमांड अवधि के दौरान कुछ और स्थानों पर छापेमारी, दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों, आंतरिक खींचतान और विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई के कारण राजनीतिक दबाव का सामना कर रही है. ऐसे में जहांगीर खान की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है.

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