TMC सांसदों की राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की मांग खारिज, राष्ट्रपति भवन ने बताई समय की कमी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बीच विवाद गहराता जा रहा है. TMC सांसदों ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन राष्ट्रपति भवन ने अब समय की कमी का हवाला देते हुए इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है.

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए मांगा गया समय राष्ट्रपति भवन ने अस्वीकार कर दिया है. सूत्रों के अनुसार गुरुवार को राष्ट्रपति कार्यालय ने ‘समय की कमी’ का हवाला देते हुए इस अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
यह घटनाक्रम उस हालिया विवाद के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू ने बागडोगरा हवाईअड्डे पर अपने स्वागत के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य के किसी कैबिनेट मंत्री के मौजूद न होने पर निराशा जताई थी. राष्ट्रपति पश्चिम बंगाल में एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेने पहुंची थीं.
टीएमसी सांसदों ने मांगा था मुलाकात का समय
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने 9 मार्च को राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र लिखकर मुलाकात के लिए समय का अनुरोध किया था. इस पत्र में 12 से 15 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल के लिए समय मांगा गया था.
इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री भी शामिल होने वाले थे. टीएमसी का कहना था कि वे समाज के सभी वर्गों के ‘समावेशी विकास’ के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी राष्ट्रपति के साथ साझा करना चाहते थे.
राष्ट्रपति भवन ने क्या दिया जवाब
राष्ट्रपति भवन की ओर से टीएमसी को सूचित किया गया कि उनके अनुरोध पर विचार किया गया, लेकिन व्यस्त कार्यक्रम और समय के अभाव के कारण इस मुलाकात को संभव नहीं बनाया जा सकता.
सूत्रों का कहना है कि इसके बाद टीएमसी ने एक और पत्र भेजकर अगले सप्ताह के लिए समय देने का अनुरोध किया है.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह राजनीतिक विवाद शनिवार को उस समय शुरू हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली आदिवासी समुदाय के एक सम्मेलन में अपेक्षा से कम लोगों की मौजूदगी पर नाराजगी जताई.
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल को बिधाननगर से बागडोगरा हवाईअड्डे के पास स्थानांतरित किए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए. उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि क्या प्रशासन को यह उम्मीद थी कि कार्यक्रम में लोग शामिल नहीं हो पाएंगे.
स्वागत के लिए मंत्री न पहुंचने पर जताई नाराजगी
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी उल्लेख किया कि उनके आगमन के समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य सरकार का कोई मंत्री हवाईअड्डे पर मौजूद नहीं था. इस टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में विवाद और तेज हो गया.
ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति के बयान पर उठाए सवाल
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति "भाजपा की सलाह पर" बयान दे रही हैं.
उन्होंने मणिपुर और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आदिवासियों के खिलाफ कथित घटनाओं पर राष्ट्रपति की "चुप्पी" को लेकर भी सवाल उठाए.
भाजपा ने टीएमसी सरकार पर साधा निशाना
वहीं भाजपा ने इस पूरे मामले को राष्ट्रपति के ‘अपमान’ से जोड़ते हुए टीएमसी सरकार की कड़ी आलोचना की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना को ‘शर्मनाक’ और ‘अभूतपूर्व’ बताया और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीएमसी ने राजनीतिक शिष्टाचार की सीमाएं पार कर दी हैं.
चुनावी माहौल में तेज हुई सियासत
इस विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति का तापमान और बढ़ा दिया है. राज्य में लगातार तीन बार से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को अब मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर चुकी भाजपा से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.


