ईरान हमले पर ट्रंप की रणनीति पर सवाल, पूर्व NSA बोले- 'वो ईरान को वेनेजुएला समझ बैठे'

ईरान पर हमले के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. ट्रंप पर निशाना साधते हुए, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने टिप्पणी की कि राष्ट्रपति को लगता है कि वे ईरान में भी ठीक वैसा ही तख्तापलट करवा सकते हैं, जैसा उन्होंने वेनेजुएला में किया था लेकिन इस बार, वे गलत हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: ईरान पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब अपने ही देश में आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने ट्रंप की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि शायद उन्हें लगा होगा कि वे वेनेजुएला की तरह ही ईरान में भी जल्दी से सत्ता परिवर्तन करा सकते हैं, लेकिन यह सोच पूरी तरह गलत साबित हुई.

मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में बोल्टन ने ट्रंप के फैसलों और उनकी रणनीतिक सोच पर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि ईरान जैसे जटिल हालात में बिना ठोस योजना के कदम उठाना बड़ी गलती साबित हो सकता है.

उन्हें लगा कि वेनेजुएला जैसा कर सकते हैं

इंटरव्यू के दौरान जॉन बोल्टन ने कहा कि ट्रंप ने संभवतः यह मान लिया था कि वे ईरान में भी वेनेजुएला जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, 'उन्हें शायद लगा है कि वह वेनेजुएला जैसा कर सकते हैं. लेकिन जब उन्होंने ऐसा सोचा, तब वह गलत थे. आज वह साफ तौर पर गलत हैं.'

ट्रंप अक्सर बिना रणनीतिक सोच के लेते हैं फैसले

बोल्टन ने आरोप लगाया कि ट्रंप कई बार बिना पर्याप्त तैयारी और रणनीतिक योजना के बड़े फैसले ले लेते हैं. उन्होंने कहा कि सैन्य अभियान जैसे गंभीर मामलों में गहन रणनीति और तैयारी की आवश्यकता होती है.

उन्होंने कहा, 'मुझे शक है कि वह इसके लिए तैयार है, क्योंकि वह शायद ही कभी किसी चीज के लिए तैयार होते हैं. वह स्ट्रेटजिक सोच को फॉलो नहीं करते. वह आवेश में आकर काम करते हैं.'

पहले भी दी गई थी संभावित खतरों की चेतावनी

पूर्व NSA ने बताया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी उन्हें स्पष्ट रूप से समझाया गया था कि ईरान में तख्तापलट की कोशिश के गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से गुजरने वाली तेल आपूर्ति पर खतरा पैदा हो सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

अमेरिकी सेना के प्रदर्शन की भी की सराहना

हालांकि ट्रंप की रणनीति की आलोचना करने के बावजूद जॉन बोल्टन ने अमेरिकी सैन्य अभियान के कुछ पहलुओं की सराहना भी की.

उन्होंने कहा कि अब तक सैन्य अभियान का प्रदर्शन प्रभावी रहा है और संकेत दिया कि ईरान की सैन्य क्षमता के कई अहम हिस्से कमजोर पड़ चुके हैं.

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि उनका कम्युनिकेशन, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम असरदार तरीके से खत्म कर दिया गया है. उनके कई जरू एसेट्स खत्म कर दिए गए हैं.'

बोल्टन के अनुसार, ईरान की एयर फोर्स और नेवी को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि फारस की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही को लेकर खतरा अभी भी बना हुआ है.

यह फैसला नेतन्याहू का नहीं, ट्रंप का था

बोल्टन ने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका को इस युद्ध में शामिल होने के लिए प्रभावित किया.

उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि नेतन्याहू ट्रंप को किसी तरह बहका सकते थे और यह पूरी तरह ट्रंप का अपना फैसला था.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन को जल्द ही अपने उद्देश्यों को स्पष्ट करना चाहिए.

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