ईरान युद्ध में अमेरिका को हुआ करोड़ों का नुकसान, ट्रंप सरकार पर उठे सवाल

ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. अमेरिका स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार ईरानी मिसाइलों, ड्रोनों और एक दुर्भाग्यपूर्ण 'फ्रेंडली फायर' घटना के कारण अमेरिकी सैन्य उपकरणों को लगभग 19,400 करोड़ से 23,700 करोड़ तक का नुकसान हुआ है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. CSIS थिंक टैंक के अनुसार, ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों साथ ही एक "फ्रेंडली फायर" की घटना के परिणामस्वरूप अमेरिकी सैन्य उपकरणों को 23,700 करोड़ का नुकसान हुआ है.

करोड़ों को हुआ नुकसान

ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. अमेरिका स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार ईरानी मिसाइलों, ड्रोनों और एक दुर्भाग्यपूर्ण 'फ्रेंडली फायर' घटना के कारण अमेरिकी सैन्य उपकरणों को $2.3 बिलियन से $2.8 बिलियन (लगभग 19,400 करोड़ से 23,700 करोड़) तक का नुकसान हुआ है. यह अनुमान मुख्य रूप से हवाई संपत्तियों से संबंधित है, इसमें अमेरिकी ठिकानों या नौसैनिक जहाजों को हुए नुकसान को शामिल नहीं किया गया है.


अमेरिका को 24,000 करोड़ का नुकसान

26 मार्च को अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कैबिनेट बैठक के दौरान बड़े-बड़े दावे किए. उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास में पहले कभी भी किसी देश की सेना को इतनी तेजी और प्रभावी ढंग से कमजोर नहीं किया गया था हालांकि ठीक अगले ही दिन 27 मार्च को ईरान ने सऊदी अरब में स्थित 'प्रिंस सुल्तान' अमेरिकी हवाई अड्डे पर मिसाइल और ड्रोन हमला कर दिया.

इस हमले में, एक अत्यंत महंगा E-3 AWACS रडार डिटेक्शन विमान नष्ट हो गया, जिसकी कीमत लगभग 5,920 करोड़ थी. यह विमान एक उड़ते हुए कमांड सेंटर के रूप में काम करता था, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के विमानों और मिसाइलों का पता लगाने में सक्षम था.

ईरानी हमलों और एक 'फ्रेंडली फायर' घटना के परिणामस्वरूप हुआ कुल नुकसान लगभग 19,400 करोड़ से 23,700 करोड़ के बीच था. कुवैत में भी 'फ्रेंडली फायर' के कारण तीन F-15 लड़ाकू विमान नष्ट हो गए थे. युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ. ईरान ने न केवल अमेरिकी ठिकानों पर बल्कि खाड़ी देशों में मौजूद उन ठिकानों पर भी हमले किए जहां अमेरिकी सैनिक तैनात थे.

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में भी बाधा डाली जिससे तेल के परिवहन पर असर पड़ा. CSIS के एक विशेषज्ञ का मानना है कि खाड़ी देशों पर ईरान के हमले एक रणनीतिक भूल साबित हुए, क्योंकि इन हमलों ने इन देशों को अमेरिका के और भी करीब ला दिया.

अमेरिका के सामने चुनौतियां

अमेरिका ने इस संघर्ष के संबंध में पूरी तरह से पारदर्शिता नहीं बरती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन चुनावी कारणों से हताहतों से जुड़ी पूरी जानकारी छिपा रहा है. हालांकि ईरान के साथ इस संघर्ष में अमेरिका को कुछ ऑपरेशनल सफलताएं मिली हैं, लेकिन उसके रणनीतिक लक्ष्य अभी भी दूर नजर आते हैं. 2003 के इराक युद्ध और अफगानिस्तान में हुए संघर्ष की तरह ही, यहां भी ऑपरेशनल जीतें रणनीतिक हार में बदल सकती हैं.

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