बायोमेट्रिक लॉक और एक ही गेट बना काल, लखनऊ की उस इमारत में कैसे फंसी 15 जानें, ये हैं 5 बड़ी वजहें

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का आलीशान अलीगंज इलाका एक दर्दनाक हादसे से दहल उठा है. यहां एक आवासीय इमारत में भड़की भीषण आग ने 15 मासूम बच्चों की जिंदगी छीन ली.

calender

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का आलीशान अलीगंज इलाका एक दर्दनाक हादसे से दहल उठा है. यहां एक आवासीय इमारत में भड़की भीषण आग ने 15 मासूम बच्चों की जिंदगी छीन ली. जब दमकल कर्मी राख हो चुकी इस इमारत के भीतर दाखिल हुए, तो सुरक्षा मानकों की जो हकीकत सामने आई, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. रिहाइश के लिए बनी इस अवैध बिल्डिंग का इस्तेमाल व्यावसायिक कामों के लिए हो रहा था, जिसमें धड़ल्ले से गेमिंग जोन, पेट शॉप और कई दुकानें संचालित की जा रही थीं. हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2016 में ही इस इमारत को अवैध निर्माण के चलते ढहाने का आदेश जारी हुआ था. लेकिन महज दो महीने के भीतर इस आदेश को रहस्यमयी तरीके से वापस ले लिया गया.

बायोमेट्रिक गेट लॉक सिस्टम बना सबसे बड़ा काल

इस हादसे में बच्चों की मौत की सबसे बड़ी वजह इमारत की तकनीकी लापरवाही रही. पीड़ित परिवारों के मुताबिक, गेमिंग जोन और एनीमेशन सेंटर का पूरा ढांचा ऑटोमैटिक था, जहां मुख्य दरवाजा बायोमेट्रिक थंब इंप्रेशन अंगूठे के निशान से खुलता और बंद होता था. जैसे ही शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य कारण से आग भड़की, वैसे ही बिल्डिंग का पूरा बिजली और ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम फेल हो गया. बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता यही गेट था, जो लॉक हो चुका था. परिजनों में इस बात को लेकर भी भारी आक्रोश है कि सूचना देने के करीब 40 मिनट बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, तब तक लपटें पूरी इमारत को अपनी आगोश में ले चुकी थीं.

बेअसर साबित हुआ बाथरूम का सहारा

इमारत के तीनों तरफ अन्य मकान सटे होने के कारण बाहर निकलने या भागने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था. आग चूंकि आगे के हिस्से में लगी थी, इसलिए डरे-सहमे बच्चे जान बचाने के लिए पीछे की तरफ भागे. कुछ बच्चों ने पाइपलाइन और लटके तारों के सहारे नीचे कूदने का प्रयास किया. इसी बीच, एक युवक ने खिड़की का कांच तोड़कर छलांग लगाई, लेकिन वह सीधे नीचे लगी नुकीली लोहे की रेलिंग पर जा गिरा. रेलिंग पेट के आर-पार होने और अत्यधिक खून बहने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

बच्चों ने खुद को बचाने के लिए क्या किया

जैसे-जैसे धुआं बढ़ा, कई बच्चों ने खुद को बचाने के लिए बाथरूम का रुख किया. उन्होंने नल खोल दिए ताकि पानी की वजह से आग की गर्मी उन तक पहुंच नहीं पाई, लेकिन यह फैसला आत्मघाती साबित हुआ. वेंटिलेशन न होने के कारण बाथरूम में जहरीला धुआं भर गया और ज्यादातर बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई.

प्रशासन का बड़ा एक्शन

अग्निशमन विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया कि इतनी बड़ी व्यावसायिक गतिविधि होने के बावजूद इमारत में न तो कोई स्मोक डिटेक्टर लगा था और न ही आग बुझाने वाले फायर एक्सटिंग्यूशर सिलेंडर मौजूद थे. अंत में दमकल कर्मियों ने हथौड़ों से पड़ोस की दीवारें तोड़कर अंदर जाने का रास्ता बनाया, लेकिन तब तक सब कुछ स्वाहा हो चुका था. इस मामले में यूपी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है और बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है. First Updated : Tuesday, 23 June 2026