'हम मिले न मिले, गुरुदेव हमेशा साथ रहेंगे', प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को दी खास सीख

प्रेमानंद महाराज ने एकांतवास और मौन व्रत के बीच भक्तों को संदेश दिया कि वे शारीरिक रूप से भले न मिलें, लेकिन उनका प्रेम और आशीर्वाद हमेशा भक्तों के साथ रहेगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

लखनऊ: वृंदावन के प्रसिद्ध संत और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री हित प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में अपने भक्तों के लिए भावुक संदेश जारी किया है. एकांतवास और मौन व्रत के बीच महाराज जी ने अपने अनुयायियों को भरोसा दिलाया कि चाहे वे प्रत्यक्ष रूप से मिलें या नहीं, उनका स्नेह और आशीर्वाद हमेशा भक्तों के साथ रहेगा. 

भक्तों से क्या बोले महाराज प्रेमानंद? 

उन्होंने कहा कि गुरुदेव का संबंध केवल शारीरिक उपस्थिति तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह भक्तों के मन और विचारों में सदैव जीवित रहता है. दरअसल, आश्रम की ओर से कुछ दिन पहले सूचना जारी की गई थी कि महाराज जी की पदयात्रा, व्यक्तिगत दर्शन और वार्तालाप जैसे कार्यक्रम फिलहाल स्थगित रहेंगे. इस खबर के बाद दूर-दूर से वृंदावन पहुंचने वाले कई श्रद्धालु निराश हो गए. भक्तों की भावनाओं को देखते हुए प्रेमानंद महाराज जी स्वयं आश्रम के बाहर आए और सभी को दर्शन देकर सांत्वना दी. उन्होंने कहा कि भक्त चिंता न करें, क्योंकि प्रेम और आस्था का रिश्ता शब्दों और मुलाकातों का मोहताज नहीं होता.

महाराज जी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सच्चा सहारा केवल प्रभु का होता है. उन्होंने भक्तों को समझाया कि जीवन का आधार किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि अपने इष्ट देव को बनाना चाहिए. अगर कभी ऐसा लगे कि जीवन किसी इंसान के भरोसे चल रहा है, तो उस भावना से तुरंत बाहर आना चाहिए. उन्होंने श्रद्धालुओं से सांसारिक चिंताओं को त्यागकर भजन, नामस्मरण और प्रभु की भक्ति में मन लगाने की अपील की.

एकांतवास और मौन व्रत को लेकर क्या बोले प्रेमानंद महाराज?

एकांतवास और मौन व्रत को लेकर भी महाराज जी ने विशेष बात कही. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मौन केवल व्यक्तिगत साधना के लिए नहीं है, बल्कि भक्तों के कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति के उद्देश्य से है. उनके अनुसार, अब उनका जीवन पूरी तरह भक्तों और सेवा के लिए समर्पित है. उन्होंने कहा कि यह मौन स्थायी नहीं रहेगा और समय आने पर वह स्वयं इसकी जानकारी देंगे.

अपने संदेश के अंत में प्रेमानंद महाराज जी ने भक्तों को सरल लेकिन गहरा आध्यात्मिक मंत्र दिया. उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक भजन करें, राधा रानी का स्मरण करें और प्रसन्न रहें. महाराज जी ने दोहराया कि चाहे वे बोलें या न बोलें, सामने आएं या न आएं, उनका प्रेम हमेशा भक्तों के साथ रहेगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि गुरुदेव का सच्चा साथ बाहरी उपस्थिति में नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास में महसूस होता है.

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