लखनऊ: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट अब अपनी पूरी व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गया है. सुरक्षा से लेकर प्रशासन और चढ़ावे की गिनती तक कई स्तरों पर बदलाव किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में मंदिर में काम करने वाले सभी 349 कर्मचारियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है. इस प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों की जिम्मेदारियों, कामकाज और पृष्ठभूमि की भी जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को कम किया जा सके.
मंदिर की व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव चढ़ावे की गिनती से जुड़ा है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मिलकर इस प्रक्रिया के लिए नई व्यवस्था तैयार की है. नई व्यवस्था के तहत चढ़ावे की गिनती का काम करने वाले पुराने 36 कर्मचारियों की भूमिका समाप्त कर दी गई है. अब मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गिनती का जिम्मा एसबीआई की ओर से नियुक्त नए और अधिकृत कर्मचारियों को सौंपा जाएगा.
ट्रस्ट का मानना है कि इस बदलाव से चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी. इसके साथ ही जिम्मेदारी तय करना भी आसान होगा. नई व्यवस्था में निगरानी और जवाबदेही पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. मंदिर ट्रस्ट की कोशिश है कि चढ़ावे से जुड़ी हर प्रक्रिया सुरक्षित और स्पष्ट तरीके से संचालित हो. कर्मचारियों की स्क्रीनिंग और नई निगरानी व्यवस्था के जरिए श्रद्धालुओं के भरोसे को भी मजबूत करने की योजना है.
इसी बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित होने वाली है. इस बैठक में ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे और मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. बैठक में नए महासचिव के चयन को लेकर भी फैसला हो सकता है. इसके अलावा लंबे समय से खाली पड़े दो अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है.
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के नए महासचिव के पद पर विश्व हिंदू परिषद से जुड़े किसी व्यक्ति की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है. चढ़ावा चोरी मामले के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे. ऐसे में अब ट्रस्ट अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव और जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट करने की दिशा में काम कर रहा है.
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद कुछ पद खाली हैं. इन्हीं पदों पर नए लोगों की नियुक्ति को लेकर बैठक में मंथन किया जाएगा. बैठक को दो सत्रों में आयोजित किया गया है. पहले सत्र की शुरुआत दोपहर 3 बजे होगी, जिसमें खाली पदों पर नियुक्ति को लेकर चर्चा की जाएगी. इसके बाद शाम 4 बजे से दूसरे सत्र में अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा.
चढ़ावा चोरी मामले के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव की नियुक्ति को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के लिए नए नेतृत्व की भूमिका अहम हो सकती है. इसके अलावा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन से खाली हुए पद पर उनके बेटे और राज परिवार से जुड़े साहित्यकार यतींद्र मिश्र के नाम पर भी विचार किए जाने की संभावना है. वहीं, ट्रस्ट में अयोध्या के किसी संत को शामिल करने की संभावना भी जताई जा रही है.
बैठक में मंदिर के चढ़ावे की गिनती, लेखा-जोखा, बैंकिंग व्यवस्था और वित्तीय निगरानी से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और उनके काम की निगरानी को लेकर भी नई व्यवस्था तैयार की जा सकती है. ट्रस्ट अब ऐसी प्रणाली विकसित करना चाहता है, जिसमें हर स्तर पर जिम्मेदारी तय हो और किसी भी तरह की अनियमितता की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद मंदिर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना है. इसी वजह से कर्मचारियों की स्क्रीनिंग से लेकर चढ़ावे की गिनती तक पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है. First Updated : Wednesday, 22 July 2026