ब्रेन-डेड घोषित महिला में लौटी जिंदगी, एम्बुलेंस के गड्ढे से टकराने के बाद हुआ चमत्कार

उत्तर प्रदेश में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां डॉक्टरों द्वारा ब्रेन-डेड घोषित की गई महिला में अचानक जीवन के संकेत दिखने लगे. बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय एम्बुलेंस सड़क के गड्ढे से टकराई, जिसके झटके के बाद महिला की सांसें फिर से चलने लगीं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

बरेली: उत्तर प्रदेश में एक परिवार ने कुछ ही पलों में गहरे दुख से लेकर अप्रत्याशित खुशी तक का सफर तय किया. डॉक्टरों द्वारा ब्रेन-डेड घोषित की गई एक महिला अचानक दोबारा सांस लेने लगी, जब उसे ले जा रही एम्बुलेंस रास्ते में एक गड्ढे से टकरा गई. इस घटना ने परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया.

यह मामला बरेली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-74 का बताया जा रहा है, जहां एम्बुलेंस के एक गड्ढे में गिरने से महिला की स्थिति अचानक बदल गई. जिस महिला को डॉक्टरों ने "बचने की कोई उम्मीद नहीं" बताया था, उसी के दोबारा सांस लेने से परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं रहा.

अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय हुआ चमत्कार

रिपोर्ट के अनुसार, महिला का नाम विनीता शुक्ला है, जो पिछले महीने 22 फरवरी को घर पर काम करते समय अचानक बेहोश हो गई थीं. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए बरेली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें ब्रेन-डेड घोषित कर दिया.

डॉक्टरों के यह कहने के बाद कि अब उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है, परिवार गहरे सदमे में था. 24 फरवरी को उनके अंतिम संस्कार के लिए परिजन उन्हें एम्बुलेंस से घर वापस ले जा रहे थे.

गड्ढे के झटके से बदली हालत

रास्ते में एक अप्रत्याशित घटना हुई जिसने पूरे घटनाक्रम को बदल दिया. एम्बुलेंस जब सड़क के एक बड़े गड्ढे से टकराई तो वाहन जोर से हिल गया. इसी झटके के बाद विनीता की स्थिति में अचानक बदलाव दिखाई देने लगा.

विनीता के पति कुलदीप कुमार शुक्ला ने बताया,"वह सांस नहीं ले रही थी. बस एक धीमी होती हुई धड़कन थी,"

उन्होंने आगे कहा,"जैसे ही एम्बुलेंस हाफिजगंज पहुंची, वह एक बड़े गड्ढे में जा टकराई और वाहन बुरी तरह हिल गया."

झटके के बाद विनीता की सांसें सामान्य होने लगीं, जिससे परिवार को उम्मीद की नई किरण दिखाई दी.

तुरंत अस्पताल ले जाया गया

इस घटना के बाद परिवार ने तुरंत अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां रोक दीं. इसके बाद विनीता को पीलीभीत के न्यूरोसिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज किया.

कुलदीप कुमार शुक्ला के मुताबिक, उपचार के बाद विनीता की हालत में सुधार हुआ और वह एक दिन बाद घर लौट आईं. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को "मृत्यु पर विजय" बताया.

पहले क्यों किया गया था ब्रेन-डेड घोषित

रिपोर्ट के अनुसार, विनीता शुक्ला पीलीभीत की न्यायिक अदालतों में कार्यरत हैं. 22 फरवरी को अचानक बेहोश होने के बाद उन्हें बरेली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि वह पूरी तरह से प्रतिक्रिया नहीं दे रही थीं और उनके मस्तिष्क में किसी प्रकार की गतिविधि दिखाई नहीं दे रही थी. इसी आधार पर उन्हें ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया था.

बाद में पीलीभीत के अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि जांच, निदान और उसके बाद किए गए उपचार से विनीता को ठीक होने में मदद मिली.

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