2 नहीं, पाकिस्तानी अब 3 नोबेल मांग रहा, जानिए शहबाज-मुनीर-डार के अलावा कौन है चौथा 'पीसमेकर'
पाकिस्तान की पंजाब असेंबली में एक दिलचस्प प्रस्ताव पेश किया गया है. इसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग की गई है. प्रस्ताव में दावा किया गया है कि इन तीनों नेताओं ने अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है.

पाकिस्तान खुद को ईरान-अमेरिका तनाव के बीच वैश्विक शांति दूत साबित करने की कोशिश में जुटा हुआ है. पंजाब प्रांत की विधानसभा ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार देने की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव पास किया है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के चीफ व्हिप राणा मोहम्मद अरशद द्वारा सदन में पेश इस प्रस्ताव में इन तीनों नेताओं की प्रभावी कूटनीति की तारीफ की गई है और दावा किया गया है कि उन्होंने क्षेत्रीय शांति बनाए रखने में प्रमुख भूमिका निभाई.
पंजाब असेंबली में नोबेल पुरस्कार का प्रस्ताव
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की सिफारिश की गई है. यह प्रस्ताव पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के चीफ व्हिप राणा मोहम्मद अरशद द्वारा सदन में रखा गया. प्रस्ताव के अनुसार, सदन ने देश के नेतृत्व की प्रभावी कूटनीति की सराहना की है. प्रस्ताव में कहा गया है कि इन नेताओं के प्रयासों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त किया है.
इजरायल-अमेरिका-ईरान तनाव में पाक की भूमिका का दावा
प्रस्ताव में विशेष रूप से इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का उल्लेख किया गया है, जो वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन गया था. असेंबली का मानना है कि पाकिस्तान के इन तीनों शीर्ष नेताओं ने इस अंतरराष्ट्रीय संकट को टालने और युद्धविराम कराने में प्रमुख भूमिका निभाई है.
शांतिप्रिय राष्ट्र की छवि बनाने की कोशिश
पंजाब असेंबली ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान ने एक शांतिप्रिय देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर एक रचनात्मक, संतुलित और सकारात्मक भूमिका निभाई है. प्रस्ताव में सर्वसम्मति से मांग की गई है कि इन प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए और इनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार हेतु औपचारिक नामांकन भेजा जाए.
आर्थिक संकट के बीच शांति दूत की छवि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान खुद गहरे आर्थिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रहा है, लेकिन सत्ताधारी दल इसे वैश्विक शांति दूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है. यदि यह नामांकन औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है, तो यह पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि साबित हो सकता है.


