होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंडाब पर खतरा, 'आंसुओं का द्वार' बना दुनिया की चिंता

मध्य पूर्व तनाव के बीच होर्मुज के साथ-साथ बाब अल-मंडाब जलडमरूमध्य भी वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरा है. हूथी हमलों और ईरान की चेतावनियों से तेल सप्लाई, शिपिंग लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच समुद्री रास्तों को लेकर स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने और ईरान की सैन्य कार्रवाई से राहत दिलाने की कोशिशों में जुटे हैं. वहीं, दूसरी ओर एक और अहम समुद्री मार्ग बाब अल-मंडाब जलडमरूमध्य वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है. खतरनाक समुद्री परिस्थितियों के कारण इसे “आंसुओं का द्वार” भी कहा जाता है और अब यह जारी संघर्ष में नया संवेदनशील बिंदु बनकर उभर रहा है.

हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े

दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े. ड्रोन और मिसाइल हमलों के आदान-प्रदान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग ठप कर दिया. यह वही रास्ता है जिससे दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति गुजरती है. ईरान ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है. अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण ईरान इस जलडमरूमध्य पर मजबूत पकड़ रखता है, जिससे उसे जहाजों की निगरानी और हमले की रणनीतिक बढ़त मिलती है.

इसी बीच, ईरान समर्थित यमन के हूथी विद्रोहियों ने बाब अल-मंडाब जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित करने की धमकी दी है. यह मार्ग वैश्विक व्यापार के लगभग 12 प्रतिशत हिस्से के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. हूथी समूह पहले भी लाल सागर और अदन की खाड़ी में जहाजों को निशाना बना चुका है. उनका दावा है कि वे इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाते हैं, खासकर गाजा युद्ध के बाद से उनकी गतिविधियां बढ़ी हैं.

बाब अल-मंडाब जलडमरूमध्य के बारे में 

बाब अल-मंडाब जलडमरूमध्य भौगोलिक रूप से यमन, जिबूती और इरिट्रिया के बीच स्थित है और यह लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है. इस मार्ग का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसके जरिए जहाजों की यात्रा दूरी काफी कम हो जाती है. उदाहरण के तौर पर, सऊदी अरब से यूरोप जाने वाले जहाजों को इस रास्ते से हजारों किलोमीटर की दूरी बचती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हूथी विद्रोही इस मार्ग को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर पड़ सकता है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, हर दिन लाखों बैरल तेल इस मार्ग से गुजरता है. हालांकि बाब अल-मंडाब को पूरी तरह बंद करना आसान नहीं है, लेकिन लगातार हमलों का खतरा ही शिपिंग कंपनियों के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है.

बीमा लागत में वृद्धि और सुरक्षा चिंताओं के कारण कंपनियां वैकल्पिक मार्ग चुनने पर मजबूर हो सकती हैं, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे. यदि होर्मुज और बाब अल-मंडाब दोनों ही मार्ग प्रभावित होते हैं, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और भी गंभीर हो सकता है.

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