ट्रंप के युद्धविराम के दावे पर ईरान की प्रतिक्रिया, कहा- कम से कम छह महीने के युद्ध के लिए तैयार हैं
ईरान ने साफ किया है कि वह छह महीने तक भी युद्ध जारी रखने के लिए तैयार है और अपनी रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा. वहीं ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने युद्धविराम मांगा है, लेकिन अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की शर्त रखी है.

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अपने रुख को और सख्त कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को स्पष्ट कहा कि उनका देश लंबे समय तक संघर्ष के लिए तैयार है और अपनी रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि यह टकराव छह महीने तक भी खिंच सकता है और ईरान किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है.
अराघची ने एक सवाल के जवाब में कहा, “हम कम से कम छह महीने तक इस स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं और अपने देश की सुरक्षा के लिए हर स्तर तक जाएंगे।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान संघर्ष खत्म करने के लिए युद्धविराम की कोशिश कर रहा है.
युद्धविराम पर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर युद्धविराम की इच्छा जताई है, लेकिन इस पर विचार तभी किया जाएगा जब होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला और सुरक्षित होगा. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जब तक यह शर्त पूरी नहीं होती, तब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा. हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरान की ओर से यह प्रस्ताव किस अधिकारी ने रखा. उन्होंने अपने बयान में एक “नए शासन के राष्ट्रपति” का जिक्र किया, लेकिन इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी.
ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान का नया नेतृत्व पहले की तुलना में अधिक समझदार है और उसने युद्धविराम का अनुरोध किया है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध नहीं बनाया गया, तो अमेरिका की कार्रवाई और तेज हो सकती है.
28 फरवरी को हुई विवाद की शुरुआत
इस पूरे विवाद की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इन हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों, परमाणु सुविधाओं और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया. शुरुआती हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की भी खबर सामने आई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई.
इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला शुरू कर दी. ये हमले इज़राइल, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और पश्चिम एशिया के अन्य सहयोगी देशों को निशाना बनाकर किए गए. अब यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले चुका है, जहां दोनों पक्ष लगातार हमले कर रहे हैं और आगे की सैन्य कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं.


