ईरान ने Amazon को बनाया निशाना, डिजिटल और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंची लड़ाई
ईरान ने अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी, जिसके बीच बहरीन में अमेजन के डेटा सेंटर के पास ड्रोन हमले से ऑपरेशन प्रभावित हुए.

मध्य पूर्व में जारी बड़े संघर्ष के बीच अब जंग का दायरा डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर तक फैलता नजर आ रहा है. ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि वह अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बना सकता है. अब इस दिशा में पहला असर भी देखने को मिला है. एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन स्थित अमेजन के डेटा सेंटर के पास ड्रोन हमले हुए हैं, जिनके चलते वहां के ऑपरेशन्स प्रभावित हुए.
कार्यप्रणाली पर असर
यह डेटा सेंटर सीधे हमले का शिकार नहीं बना, लेकिन आसपास हुए धमाकों और हमलों की वजह से इसकी कार्यप्रणाली पर असर पड़ा है. इससे साफ संकेत मिलता है कि अब जंग सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि टेक इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसके दायरे में आ रहा है.
1 अप्रैल 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, ईरान ने खुलकर कहा है कि वह अमेरिकी टेक कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है. इस सूची में Meta, Google, Apple और Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुल 18 अमेरिकी टेक कंपनियों को संभावित निशाने के तौर पर चिन्हित किया गया है.
ईरान का क्या कहना है?
ईरान का कहना है कि खासतौर पर वे कंपनियां जो मध्य पूर्व में डेटा, क्लाउड सर्विस या डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर चला रही हैं, उन्हें टारगेट किया जा सकता है. इससे क्षेत्र में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और साइबर व फिजिकल हमलों का खतरा भी बढ़ता दिख रहा है.
इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. ट्रंप ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अमेरिकी कंपनी या उसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया जाता है तो उसका जवाब सख्ती से दिया जाएगा. उन्होंने इसे सीधे तौर पर अमेरिकी हितों पर हमला बताया है.
ट्रंप ने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई के खिलाफ अमेरिका सैन्य और आर्थिक दोनों स्तरों पर जवाब देने के लिए तैयार है. इससे यह साफ हो गया है कि अगर टेक कंपनियों पर हमले बढ़ते हैं, तो यह संघर्ष और व्यापक तथा खतरनाक रूप ले सकता है.


