ईरान में सत्ता का बदला खेल! IRGC बना देश का असली शासक, राष्ट्रपति पेजेश्कियन के साथ बढ़ा मतभेद

युद्ध के कारण ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया, लेकिन उनकी मौजदगी ना होने के कारण IRGC ने कमान संभाल ली है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: ईरान में सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल गया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अब देश का असली शासक बन चुका है. राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन पूरी तरह किनारे पर धकेल दिए गए हैं. दोनों के बीच गहरा मतभेद चल रहा है. 

सुप्रीम लीडर की अनुपस्थिति ने बनाया खालीपन

अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और कई शीर्ष नेता मारे गए थे. उसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया, लेकिन उनकी कोई सार्वजनिक उपस्थिति नहीं है.

कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मोजतबा कोमा में हैं या गंभीर रूप से घायल हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है. इस राजनीतिक खालीपन ने IRGC को मौका दे दिया.

IRGC ने संभाली सत्ता

IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों का एक "मिलिट्री काउंसिल" अब रोजाना के फैसले ले रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, IRGC ने मोजतबा खामेनेई के आसपास सख्त सुरक्षा घेरा बना रखा है. राष्ट्रपति कार्यालय की रिपोर्ट्स भी उन्हें नहीं पहुंचाई जा रही है. राष्ट्रपति पेजेश्कियन कई बार सुप्रीम लीडर से मिलने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन IRGC ने हर बार अनुरोध ठुकरा दिया है. IRGC ने राष्ट्रपति द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियों को भी रोक दिया है.

पिछले हफ्ते राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने हुसैन देहगान को खुफिया मंत्री बनाने की कोशिश की, लेकिन IRGC के कमांडर अहमद वहीदी के विरोध के कारण यह नियुक्ति रद्द हो गई. वहीदी ने साफ कहा कि युद्ध के समय सभी संवेदनशील पद IRGC के नियंत्रण में रहेंगे.

राष्ट्रपति और IRGC के बीच बढ़ता दरार

राष्ट्रपति पेजेश्कियन IRGC की नीतियों से नाराज हैं. वे मानते हैं कि पड़ोसी खाड़ी देशों पर लगातार हमले करने से क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है, जिसका लंबे समय में ईरान की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.

ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही युद्ध के कारण बेहद कमजोर हो चुकी है. IRGC ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने का पूरा नियंत्रण भी उसके पास है.

IRGC की बढ़ती ताकत

1979 की क्रांति के बाद बनी IRGC अब ईरान की सबसे शक्तिशाली संस्था बन चुकी है. इसके पास तेल, परिवहन, बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे कई बड़े कारोबार हैं. सुप्रीम लीडर की अनुपस्थिति में IRGC ने सत्ता पर और मजबूत पकड़ बना ली है. यह स्थिति कई हफ्तों पहले ही अनुमानित थी. अब ईरान में असली सत्ता IRGC के हाथ में है, जबकि राष्ट्रपति पेजेश्कियन राजनीतिक रूप से किनारे पर हैं.

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