77 साल बाद टूटेगा नाटो? ट्रंप ने सैन्य गठबंधन को बताया कागजी शेर, जल्द ही अमेरिका छोड़ सकता है गठबंधन! यूरोप की सुरक्षा पर संकट

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा है कि वे अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. उन्होंने नाटो को ‘कागजी शेर’ बताया और यूरोपीय देशों की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के डेली टेलीग्राफ अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा है कि वे अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. उन्होंने नाटो को ‘कागजी शेर’ बताया और यूरोपीय देशों की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई. यह बयान ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर सहयोग न मिलने के बाद आया है.

डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख

ट्रंप ने कहा कि नाटो की विश्वसनीयता पर उन्हें लंबे समय से संदेह है. जब उनसे पूछा गया कि ईरान संघर्ष के बाद क्या वे गठबंधन में अमेरिका की सदस्यता पर पुनर्विचार करेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया, “हां, यह अब पुनर्विचार से भी आगे की बात है.” 

उन्होंने आगे कहा, “मैं नाटो से कभी प्रभावित नहीं हुआ. मुझे हमेशा पता था कि यह एक कागजी शेर है और पुतिन भी यह जानते हैं.” ट्रंप ने यूरोपीय देशों की सैन्य क्षमता की भी आलोचना की और कहा कि कई देश अपनी रक्षा के लिए अमेरिका पर ही निर्भर रहते हैं.

नाटो का इतिहास और अमेरिका की भूमिका

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना 1949 में हुई थी. यह सोवियत संघ की आक्रामकता से बचाव के लिए बनाया गया था. अब यह 77 साल पुराना हो चुका है. अमेरिका इस गठबंधन का सबसे मजबूत और सबसे बड़ा योगदान देने वाला सदस्य है. 

अमेरिका नाटो के बजट में सबसे अधिक पैसा लगाता है और यूरोप की सुरक्षा में प्रमुख भूमिका निभाता है. अनुच्छेद 5 के तहत एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है. अगर अमेरिका बाहर निकलता है तो पूरा गठबंधन कमजोर हो सकता है और यूरोप की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है.

यूरोप में हड़कंप

ट्रंप के इस बयान से यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है. कई देशों को डर है कि अमेरिका के बिना नाटो बिखर सकता है. ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग न मिलने को मुख्य वजह बताया. उन्होंने कहा कि यूरोपीय सहयोगी होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने में भी मदद करने को तैयार नहीं हुए. 

ट्रंप का मानना है कि नाटो अब अमेरिका के हितों की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि अमेरिका यूरोप की रक्षा कर रहा है. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका अब सिर्फ अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा.

यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है. अगर अमेरिका नाटो से अलग होता है तो रूस और चीन जैसे देशों की ताकत बढ़ सकती है. यूरोपीय देश अब अपनी रक्षा व्यय बढ़ाने और स्वतंत्र सुरक्षा व्यवस्था बनाने की दिशा में सोच रहे हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो