नौशेरा, इस्लामाबाद समेत पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक, मुनीर के एडवाइजर की भी मौत

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए. मंत्रालय के मुताबिक, अफगानिस्तान ने यह कार्रवाई पाकिस्तान के द्वारा कंधार, काबुल और पक्तिया में की गई कथित घुसपैठ के जवाब में थे. अफगान सेना ने पाकिस्तान के नौशेरा, एबटाबाद, जमरूद और इस्लामाबाद में कई ठिकानों पर हमले किए. वहीं अब दोनों देशों के बीच अब पूर्ण युद्ध जैसे हालात बन गए हैं.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक खतरनाक मोड़ आ गया है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहा तनाव अब खुले सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है. शुक्रवार को अफगान रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि उनकी वायुसेना ने सीमा पार जाकर पाकिस्तान के भीतर कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा अफगान शहरों पर की गई हवाई बमबारी का कड़ा बदला बताई जा रही है. इस संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर संकट में डाल दिया है.

अफगान वायुसेना की भीषण कार्रवाई

आपको बता दें कि शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे अफगानिस्तान की वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर एक साहसिक सैन्य ऑपरेशन शुरू किया. राजधानी इस्लामाबाद के पास स्थित फैसलाबाद में एक प्रमुख सैन्य कैंप को निशाना बनाया गया. इसके अलावा नौशेरा के आर्मी कैंटोनमेंट. जमरूद की सैन्य कॉलोनी और एबटाबाद के ठिकानों पर भी सटीक बमबारी की गई. इस हमले की सबसे बड़ी खबर पाकिस्तानी सेना प्रमुख के सलाहकार 'आशिक' की मौत है. तालिबान का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तानी सैन्य ढांचे को काफी गहरा नुकसान पहुँचाया है.

तालिबान की पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन हवाई हमलों को केवल एक शुरुआत बताया है. उनका स्पष्ट कहना है कि अगर पाकिस्तान ने अपनी घुसपैठ बंद नहीं की. तो वे आने वाले समय में और भी बड़े शहरों को निशाना बनाएंगे. यह कार्रवाई उस हवाई घुसपैठ का जवाब है. जो पाकिस्तान ने एक रात पहले काबुल. कंधार और पक्तिका जैसे अफगान शहरों में की थी. अफगानिस्तान का संदेश साफ है कि वे अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अब किसी भी सैन्य सीमा तक जाने को तैयार हैं.

सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका

दूसरी ओर. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने वर्तमान स्थिति को 'खुले युद्ध' जैसा करार दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पाकिस्तान के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है. इस्लामाबाद का आरोप है कि नाटो सेना के जाने के बाद अफगानिस्तान में जो शांति की उम्मीद थी. वह अब पूरी तरह खतरे में है. हालांकि. पाकिस्तान सरकार ने अफगान दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनके किसी भी सैनिक को बंदी नहीं बनाया गया है.

हताहतों की संख्या पर परस्पर विरोधी दावे

दोनों देशों के आधिकारिक बयानों में हताहतों की संख्या को लेकर भारी विरोधाभास दिख रहा है. अफगानिस्तान का दावा है कि उनके हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और कई को पकड़ लिया गया है. वहीं. पाकिस्तान का कहना है कि उन्होंने 133 तालिबानी लड़ाकों को मार गिराया है और 200 से अधिक घायल हुए हैं. पाकिस्तान के सलाहकार अताउल्लाह तरार ने केवल दो मौतों की पुष्टि की है. दावों के इस मायाजाल के बीच जमीनी हकीकत अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई है.

सबसे बुरा असर आम जनता और असहाय शरणार्थियों पर

सीमा पर बढ़ते इस तनाव का सबसे बुरा असर आम जनता और असहाय शरणार्थियों पर पड़ रहा है. टोरखम बॉर्डर पर बड़ी संख्या में मौजूद अफगान शरणार्थियों को सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार. पिछले साल लाखों लोग पाकिस्तान छोड़कर अपने वतन लौटे थे. लेकिन मौजूदा सैन्य संघर्ष ने इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना दिया है. यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है. तो दक्षिण एशिया में एक नया और भयावह मानवीय संकट पैदा होना तय है.

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