ईरान वार्ता के बीच ट्रंप ने लिया 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' रोकने का फैसला, लेकिन कायम रहेगा सैन्य दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच ट्रंप ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को अस्थायी रूप से रोक दिया है. हालांकि समुद्री नाकाबंदी जारी रहेगी, जिससे साफ है कि बातचीत के साथ-साथ दबाव की रणनीति भी कायम है.

वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक मोड़ सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए अपनी “प्रोजेक्ट फ्रीडम” पहल को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की. इस कदम को संभावित समझौते की दिशा में एक रणनीतिक चाल माना जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए समय मिल सके.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह निर्णय कई देशों, खासकर पाकिस्तान के अनुरोध के बाद लिया गया है. हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि परियोजना भले ही रोकी जा रही हो, लेकिन क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.
“We have mutually agreed that, while the Blockade will remain in full force and effect, Project Freedom (The Movement of Ships through the Strait of Hormuz) will be paused for a short period of time to see whether or not the Agreement can be finalized and signed…” - President… pic.twitter.com/R9SlC4w68g
— The White House (@WhiteHouse) May 5, 2026
'प्रोजेक्ट फ्रीडम' क्या है?
“प्रोजेक्ट फ्रीडम” अमेरिका की एक रणनीतिक पहल है, जिसका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. अमेरिका और ईरान के बीच इसी क्षेत्र को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है, जिसे कम करने के लिए इस परियोजना की शुरुआत की गई थी.
समझौते को लेकर अमेरिका की रणनीति
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि इस अस्थायी विराम से यह परखा जा सकेगा कि क्या दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते तक पहुंच सकते हैं. उन्होंने हाल के सैन्य अभियानों को “बेहद सफल” बताते हुए संकेत दिया कि अमेरिका बातचीत के दौरान भी अपना दबाव बनाए रखेगा. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समुद्री नाकाबंदी में कोई ढील नहीं दी जाएगी, जिससे यह साफ है कि अमेरिका अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना चाहता है.
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिका के इस फैसले पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि इस तरह के कदम क्षेत्र में जहाजरानी की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा और विदेशी सैन्य मौजूदगी को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा.
परमाणु समझौते को लेकर बढ़ता दबाव
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी स्पष्ट किया था कि शांति की दिशा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर निर्भर करती है. उन्होंने कहा कि यदि ईरान अमेरिका की शर्तों को स्वीकार करता है, तभी हालात सामान्य हो सकते हैं.
रुबियो ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है और अमेरिका इस दिशा में सक्रिय प्रयास कर रहा है. उन्होंने अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को “रक्षात्मक” बताते हुए कहा कि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है और एक शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है.


