बांग्लादेश में कुर्बानी से बचा 'डोनाल्ड ट्रंप' भैंसा, सरकार ने रातोंरात बचाई जान, अब बनेगा जू का आकर्षण
बांग्लादेश में 'डोनाल्ड ट्रंप' नाम से वायरल हुआ एक दुर्लभ एल्बिनो भैंसा आखिरी वक्त पर कुर्बानी से बच गया. सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता और भारी भीड़ को देखते हुए सरकार ने उसे ढाका के नेशनल जू भेजने का फैसला किया है.

नई दिल्ली: बांग्लादेश में 'डोनाल्ड ट्रंप' नाम से मशहूर हुआ एक दुर्लभ एल्बिनो भैंसा आखिरी समय में कुर्बानी से बच गया. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए इस भैंसे को लेकर लोगों में इतनी दिलचस्पी बढ़ गई कि सरकार को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा. अब इस भैंसे को ढाका के नेशनल जू में भेजने का फैसला किया गया है.
करीब 700 किलो वजनी इस एल्बिनो भैंसे की सबसे बड़ी पहचान उसके सिर पर लटकते सुनहरे बाल बने, जिन्हें देखकर लोगों ने उसकी तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हेयरस्टाइल से कर दी. देखते ही देखते इंटरनेट पर उसका नाम ही 'डोनाल्ड ट्रंप' पड़ गया और वह चर्चा का केंद्र बन गया.
कुर्बानी के लिए बिक चुका था भैंसा
यह भैंसा ईद पर कुर्बानी के लिए पहले ही बेचा जा चुका था. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और बढ़ती भीड़ ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी.
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद के निर्देश के बाद सरकार ने खरीदार को पैसे वापस लौटाने और भैंसे को सुरक्षित रूप से ढाका नेशनल जू भेजने का फैसला लिया.
एक मंत्रालय अधिकारी ने कहा, "आखिरी समय में फैसला लिया गया कि सुरक्षा कारणों और असामान्य पब्लिक इंटरेस्ट को देखते हुए भैंसे की कुर्बानी नहीं दी जाएगी."
माना जा रहा है कि सरकार नहीं चाहती थी कि 'डोनाल्ड ट्रंप' नाम को लेकर किसी तरह का अनावश्यक विवाद या तनाव पैदा हो.
सोशल मीडिया पर ऐसा वायरल हुआ कि उमड़ पड़ी भीड़
शुरुआत में यह सिर्फ कुर्बानी के लिए खरीदा गया एक सामान्य पशु था, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह पूरे बांग्लादेश में चर्चा का विषय बन गया.
ढाका के पास नरायणगंज स्थित फार्म पर लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी. दूर-दूर से लोग सिर्फ इस अनोखे भैंसे को देखने पहुंच रहे थे.
फार्म मालिक जियाउद्दीन मृधा ने बताया कि उनके छोटे भाई ने सबसे पहले इस भैंसे का नाम ‘डोनाल्ड ट्रंप’ रखा था. उसके सुनहरे बालों को देखकर उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति का मशहूर हेयरस्टाइल याद आ गया.
खास देखभाल में रखा गया था भैंसा
फार्म मालिक के मुताबिक, चार साल के इस एल्बिनो भैंसे को करीब 10 महीने पहले खरीदा गया था. इसकी विशेष देखभाल की जाती थी, जिसमें नियमित खाना और बार-बार नहलाना शामिल था.
उन्होंने बताया कि यह दूसरे भैंसों की तुलना में काफी शांत स्वभाव का है.
आखिर एल्बिनो भैंसे इतने दुर्लभ क्यों होते हैं?
बांग्लादेश में एल्बिनो भैंसे बेहद कम पाए जाते हैं. आमतौर पर वहां भैंसों का रंग काला या गहरा ग्रे होता है.
एल्बिनिज्म एक आनुवंशिक स्थिति है, जिसमें शरीर में मेलानिन नहीं बनता. इसी कारण जानवरों की त्वचा हल्की, बाल सफेद या सुनहरे और नाक गुलाबी दिखाई देती है.
इसी दुर्लभता की वजह से ऐसे जानवर लोगों का ध्यान तेजी से आकर्षित करते हैं, खासकर ईद के दौरान.
अब नेशनल जू में रहेगा 'डोनाल्ड ट्रंप'
अधिकारियों का कहना है कि भैंसे को बचाने का सबसे बड़ा कारण उसकी वायरल लोकप्रियता और बढ़ती भीड़ थी. अब इसे ढाका के नेशनल जू में रखा जाएगा, जहां इसके लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहने की उम्मीद है.


