वार्ता से पहले ट्रंप ने ईरान को दी नई टेंशन, खामेनेई से क्या चाहता है अमेरिका?

ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी, अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में ताकत बढ़ाई. ईरान के साथ वार्ता पर असमंजस, स्थान तुर्की से ओमान शिफ्ट की मांग. परमाणु मुद्दे पर सीमित चर्चा चाहता ईरान, अमेरिका अन्य मुद्दे जोड़ना चाहता है. तनाव से तेल कीमतें बढ़ीं.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेताओं को सख्त चेतावनी दी है, क्योंकि अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ा रही है. यह संकेत है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि उन्हें बहुत फिक्र होनी चाहिए. हां, होनी ही चाहिए. वे हमारे साथ चर्चा कर रहे हैं, जैसा आप जानते हैं.

यह बयान विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस कथन के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान से आगामी बैठक के लिए तैयार है. हालांकि, वार्ता के स्थान और विषयों पर असमंजस बना हुआ है. रुबियो ने बुधवार को बताया कि अमेरिका को लगता है कि शुक्रवार को तुर्की में बैठक पर सहमति बनी थी.

ट्रंप की चेतावनी

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका-ईरान संबंधों में खींचतान चरम पर है. ट्रंप ने ईरान पर हमले की धमकी कई बार दी है, अगर समझौता नहीं हुआ तो. सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने बैठक को तुर्की से ओमान में शिफ्ट करने की मांग की है और चाहता है कि क्षेत्रीय देश इसमें शामिल न हों. व्हाइट हाउस ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

ईरान बातचीत को सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रखना चाहता है, लेकिन रुबियो ने जोर दिया कि सार्थक चर्चा के लिए अन्य मुद्दे भी जरूरी हैं. इनमें ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, क्षेत्रीय आतंकी गुटों को समर्थन और वहां की जनता के साथ बर्ताव शामिल है. रुबियो ने कहा कि व्हाइट हाउस के मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ बैठक में हिस्सा लेने को तैयार हैं.

वार्ता के मुद्दों पर मतभेद

दोनों पक्षों के बीच मतभेदों से चिंता बढ़ रही है कि क्या वे तेल से भरपूर इलाके में बढ़ते संकट को सुलझा पाएंगे. अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु गतिविधियों पर लंबे समय से विवाद है, जो हाल के विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के बाद और गहरा हो गया है. तेहरान में हजारों लोगों की मौत हुई है.

अमेरिकी सेना ने बताया कि मंगलवार को अरब सागर में अब्राहम लिंकन कैरियर के पास एक ईरानी ड्रोन को अमेरिकी विमान ने गिरा दिया, जो आक्रामक तरीके से आ रहा था. इस घटना से तेल कीमतों में तेजी आई. बुधवार को ब्रेंट क्रूड 0.6% चढ़कर 67.70 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया. इस साल इसमें 11% की बढ़ोतरी हुई है, मुख्य रूप से युद्ध की आशंका से.

ओमान में संभावित बैठक

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और विटकॉफ मस्कट जा रहे हैं, जहां चर्चा परमाणु मुद्दे और प्रतिबंध हटाने तक सीमित होगी.  ईरानी छात्र ने कहा कि मुख्य विषय ईरान का परमाणु प्रोग्राम होगा और सबसे बड़ा मुद्दा प्रतिबंधों से छुटकारा पाना है. ईरान ने पहले अपनी मिसाइल क्षमताओं पर बात करने से इनकार किया है, लेकिन देश में बढ़ते असंतोष से वह कमजोर स्थिति में है. पिछले साल जून में इजरायल के हवाई हमलों के बाद बातचीत टूट गई थी. अराघची ने पिछले हफ्ते कहा कि मिसाइलों पर कभी चर्चा नहीं होगी. राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने उन्हें परमाणु समझौते के दायरे में ही बात करने को कहा है.

यह बैठक ईरान में हाल के विरोधों को हिंसक रूप से दबाने के बाद अमेरिकी-ईरानी अधिकारियों की पहली सार्वजनिक मुलाकात होगी. जून में इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को कुछ परमाणु साइटों पर रोक लगा दी थी.

तेल बाजार पर असर 

इस तनाव से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत विफल हुई तो संघर्ष बढ़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था को झटका देगा. अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है, जबकि तेहरान प्रतिबंधों से राहत मांग रहा है. दोनों पक्षों की सख्ती से स्थिति अनिश्चित बनी हुई है.

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