सीजफायर की अटकलें तेज, ईरान से बैकचैनल बातचीत में जुटा अमेरिका

अमेरिका और ईरान के बीच जारी गोपनीय बातचीत ने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है. इस बीच जेडी वेंस को स्टैंडबाय पर रखा जाना इस बात का संकेत है कि हालात कभी भी सीधे संवाद या संभावित सीजफायर की ओर बढ़ सकते हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही संवेदनशील बातचीत ने वैश्विक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है. इस बीच यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या आज ही युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर कोई बड़ा ऐलान हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय तरीके से आगे बढ़ा रहा है ताकि सीधे संवाद की स्थिति बनाई जा सके.

इस कूटनीतिक प्रयास में अमेरिका के शीर्ष स्तर के नेता सक्रिय हैं. मौजूदा समय में बातचीत का नेतृत्व राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर कर रहे हैं, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को स्टैंडबाय पर रखा गया है.

बैकचैनल बातचीत से सीधे संवाद की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, अगर बैकचैनल के जरिए हो रही बातचीत सीधे मुलाकात के स्तर तक पहुंचती है, तो जेडी वेंस इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है, "वेंस तैयार बैठे हैं. अगर बैकचैनल बातचीत ईरानी अधिकारियों के साथ सीधी मुलाक़ात के स्तर तक पहुंचती है, तो वे ईरान के साथ संवेदनशील बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार हैं."

इससे साफ है कि अमेरिका बातचीत को अगले स्तर तक ले जाने की पूरी तैयारी में है.

ईरान की शर्तों पर अब भी सस्पेंस

हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ईरान इस बातचीत के बदले में क्या शर्तें या प्रस्ताव सामने रख सकता है. यही वजह है कि संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

अमेरिका की रणनीति फिलहाल बातचीत को आगे बढ़ाने और स्थिति को नियंत्रण में रखने पर केंद्रित है.

समझौता नहीं हुआ तो बढ़ सकता है संघर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बातचीत से बड़ा समाधान निकलने की संभावना कम है, खासकर तब जब ईरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को मानने से इनकार कर दे, जिसमें उन्होंने मंगलवार रात तक होर्मुज को फिर से खोलने की डेडलाइन दी है.

अगर यह मांग पूरी नहीं होती है, तो अमेरिका संघर्ष को और तेज करते हुए ईरान के पुलों और पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता है.

ट्रंप का सख्त रुख और सैन्य कार्रवाई

अपने दूसरे कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपना चुके हैं. उन्होंने दो बार डेडलाइन तय करते हुए चेतावनी दी थी कि अगर उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी- और बाद में उन्होंने इस दिशा में कदम भी उठाए.

यह रुख मौजूदा बातचीत पर भी दबाव बना रहा है.

पर्दे के पीछे तेज कूटनीति

रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर मध्यस्थों के जरिए हो रही बातचीत आगे बढ़ती है, तो जेडी वेंस सीधे ईरानी प्रतिनिधियों से बातचीत में शामिल हो सकते हैं.

सूत्रों के हवाले से कहा गया है, "वेंस तैयार बैठे हैं. अगर बैकचैनल बातचीत ईरानी अधिकारियों के साथ सीधी मुलाक़ात के स्तर तक पहुंचती है, तो वे ईरान के साथ संवेदनशील बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार हैं."

फिलहाल इस चरण में स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ही वार्ता को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन स्थिति बदलने पर वेंस को इसमें शामिल किया जा सकता है.

बढ़ता सैन्य तनाव और जवाबी कार्रवाई

गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था. इस दौरान तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों को निशाना बनाया गया.

इसके जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इज़रायल के ठिकानों पर हमले करने की घोषणा की. साथ ही बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.

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