चीन अगले 5 साल में ताइवान पर कर सकता है हमला! ट्रंप के सलाहकारों ने किया ये बड़ा खुलासा

ट्रंप के एक सलाहकार ने Axios को बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन को उस स्थिति में ले जाना चाहते हैं जहां से वे अमेरिका को बराबरी का संदेश दे सकें।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया दो दिन की चीन यात्रा को वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव घटाने की कोशिश बताया गया था। इसे कूटनीतिक तौर पर सफल भी कहा गया। लेकिन ट्रंप के करीबी सलाहकारों को लगता है कि असलियत कुछ और है। रिपब्लिकन नेता के सलाहकारों को डर है कि चीन अगले पांच सालों में ताइवान पर हमला कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो अमेरिकी कंपनियों की एआई क्षमता पर बड़ा असर पड़ेगा।

'ताइवान मेरा है' वाला संदेश देना चाहते हैं शी जिनपिंग   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप के एक सलाहकार ने Axios को बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन को उस स्थिति में ले जाना चाहते हैं जहां से वे अमेरिका को बराबरी का संदेश दे सकें। सलाहकार के मुताबिक शी का मकसद यह दिखाना है कि बीजिंग वॉशिंगटन के बराबर है और ताइवान पर उनका हक है। उनका मानना है कि चीन के इस कदम से ग्लोबल टेक्नोलॉजी बाजार हिल सकता है। सबसे ज्यादा असर एआई चिप्स की सप्लाई चेन पर पड़ेगा। 

चिप सप्लाई चेन सबसे बड़ा मुद्दा   

Axios से बात करते हुए सलाहकार ने कहा कि ट्रंप की चीन यात्रा के बाद अगले पांच सालों में ताइवान का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहेगा। उन्होंने माना कि आर्थिक तौर पर अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं है। चिप्स की सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता अभी बहुत दूर है। सलाहकार ने जोर देकर कहा कि सीईओ और पूरी अर्थव्यवस्था के लिए चिप्स की सप्लाई चेन से बड़ा कोई मुद्दा नहीं है। अगर ताइवान पर हमला होता है तो पूरी दुनिया की चिप सप्लाई रुक सकती है।

ट्रंप के बयान से ताइवान में बढ़ी चिंता   

गौर करने वाली बात यह है कि ट्रंप ने ताइवान को आजादी का ऐलान न करने की चेतावनी भी दी है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि ताइपे को लेकर वॉशिंगटन की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। Fox News को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वे युद्ध नहीं चाहते हैं।

वे चाहते हैं कि चीन शांत रहे। ट्रंप ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि कोई आजाद हो जाए। हमें युद्ध लड़ने के लिए 9500 मील दूर जाना पड़ेगा। मैं ऐसा बिल्कुल नहीं चाहता। हम युद्ध नहीं चाहते। अगर चीजें जैसी हैं वैसी ही रहें तो चीन को भी कोई दिक्कत नहीं होगी।

ताइवान ने खुद को बताया आजाद राष्ट्र  

गौरतलब है कि ट्रंप की टिप्पणी के बाद ताइवान में चिंता बढ़ गई है। ताइवान ने दोहराया कि वह एक आजाद राष्ट्र है। अमेरिका की हथियार बिक्री पर ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह ताइपे के प्रति वॉशिंगटन की प्रतिबद्धता दिखाता है। 

विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ताइवान एक संप्रभु और आजाद लोकतांत्रिक देश है। यह पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के अधीन नहीं है। ताइवान ने साफ किया कि वह अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।

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