दिसंबर में खत्म हो रही गंगा जल संधि, भारत-बांग्लादेश में तीखा मतभेद! अब आगे क्या होगा?

बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बीएनपी ने शनिवार (16 मई 2026) को कहा कि भारत के साथ संबंध नई गंगा जल बंटवारे संधि पर निर्भर करेंगे। पार्टी ने नई दिल्ली से तत्काल बातचीत की मांग की है।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर हुआ 30 साल का समझौता इस साल दिसंबर में खत्म हो रहा है। अब तक दोनों देशों के बीच कोई नया समझौता नहीं हो पाया है। दोनों देशों की तकनीकी टीमें शुरुआती तैयारी कर रही हैं। लेकिन नए फॉर्मूले को लेकर पेंच फंस गया है। भारत अनौपचारिक तौर पर एक नया फॉर्मूला पेश कर रहा है जिसे बांग्लादेश के जल विशेषज्ञ तर्कहीन बता रहे हैं। उनका कहना है कि भारत के नए बयानों से समझौते का रिन्यू होना मुश्किल हो सकता है।

बांग्लादेश ने की जल्द बातचीत की मांग   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बीएनपी ने शनिवार (16 मई 2026) को कहा कि भारत के साथ संबंध नई गंगा जल बंटवारे संधि पर निर्भर करेंगे। पार्टी ने नई दिल्ली से तत्काल बातचीत की मांग की है।

बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि भारत सरकार को साफ संदेश है कि बांग्लादेश की जरूरतों और उम्मीदों के मुताबिक नई गंगा संधि तुरंत लागू होनी चाहिए। स्थानीय सरकार मंत्री आलमगीर ने कहा कि भारत के साथ अच्छे संबंध गंगा जल बंटवारे संधि या फरक्का समझौते पर हस्ताक्षर पर निर्भर करेंगे।

तकनीकी समितियों ने शुरू की तैयारी   

वहीं बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिद उद्दीन चौधरी एनी ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि सरकार ने इस मामले पर एक विशेषज्ञ समिति बनाई है। उम्मीद है कि दोनों देशों की विशेषज्ञ समितियां बातचीत से समाधान निकाल लेंगी।

इसके बाद संयुक्त नदी आयोग यानी जेआरसी की बैठक में अंतिम फैसला होगा। सरकारी विभागों के मुताबिक दोनों देशों की तकनीकी टीमें प्रारंभिक काम शुरू कर चुकी हैं। जेआरसी में विवरण तय होने के बाद आधिकारिक बयान जारी हो सकता है। लेकिन शर्तों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।

1996 में हुआ था पहला समझौता   

दरअसल भारत और बांग्लादेश ने फरक्का बांध चालू होने के दो दशक बाद 1996 में 30 साल का समझौता किया था। उस समझौते में कहा गया था कि दोनों देशों को मिलने वाला पानी नदी में बारिश, जल प्रवाह और गति पर निर्भर करेगा।

शर्त के मुताबिक अगर नदी में 70,000 क्यूसेक या उससे कम पानी है तो दोनों देश बराबर बंटवारा करेंगे। 70,000 से 75,000 क्यूसेक के बीच पानी होने पर बांग्लादेश को 40,000 क्यूसेक मिलेगा और बाकी भारत को जाएगा। 75,000 क्यूसेक से ज्यादा प्रवाह पर भारत को 40,000 क्यूसेक और शेष पानी बांग्लादेश को मिलेगा।

नए प्रस्ताव पर चर्चा जारी   

अब समझौते की अवधि खत्म होने के साथ नवीनीकरण या नए समझौते के लिए नए प्रस्तावों पर कई साल से चर्चा हो रही है। बांग्लादेश चाहता है कि नई संधि उसकी जरूरतों के हिसाब से हो। वहीं भारत का रुख अलग बताया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर जल्द सहमति नहीं बनी तो दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है।

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