ईरान में बड़े युद्ध की तैयारी? मस्जिदों में दी जा रही हथियार चलाने की ट्रेनिंग, इतने लोगों का हो चुका रजिस्ट्रेशन
इस समय देश भर की मस्जिदों को सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में तब्दील कर दिया गया है, जहां पुरुषों, महिलाओं और यहां तक कि किशोरों को भी हथियार चलाने और आत्मरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं.

नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य टकराव और रणनीतिक तनाव के बीच ईरान ने एक बेहद असाधारण कदम उठाया है. देश की संप्रभुता और इस्लामी गणराज्य की रक्षा के बहाने ईरान सरकार ने अपनी आम जनता को युद्ध के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है.
'ऑपरेशन जान फिदा बराए ईरान'
ईरानी सरकारी मीडिया के दावों के मुताबिक, इस समय देश भर की मस्जिदों को सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में तब्दील कर दिया गया है, जहां पुरुषों, महिलाओं और यहां तक कि किशोरों को भी हथियार चलाने और आत्मरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं. सरकारी मीडिया का दावा है कि इसके बाद अब तक 3.1 करोड़ से अधिक नागरिक युद्ध स्तर की तैयारियों के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. इस ऑपरेशन का नाम 'ऑपरेशन जान फिदा बराए ईरान' दिया गया है.
3 करोड़ से ज्यादा लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन
मस्जिदों में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही. इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर देश के नागरिकों को सरकार और सेना के समर्थन में एकजुट करना है. तेहरान प्रशासन ने जनता से वॉलंटियर्स के रूप में इस मुहिम से जुड़ने की अपील की थी.
ट्रेनिंग सेंटर बनीं मस्जिदें
ईरान सरकार ने सार्वजनिक तैयारियों को मजबूत करने के लिए धार्मिक स्थलों का सहारा लिया है. अहवाज, करमान, बीजार, शिराज और जाहेदान जैसे प्रमुख शहरों की मस्जिदों में नागरिक सुरक्षा के नाम पर भारी भीड़ जुट रही है. अस्पतालों या नागरिक केंद्रों के बजाय मस्जिदों के भीतर चल रहे इन विशेष सत्रों में वॉलंटियर्स को हल्के हथियारों को चलाने और उन्हें खोलने और वापस जोड़ने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके साथ ही, राजधानी तेहरान में सरकार समर्थक रात्रिकालीन रैलियों का आयोजन किया जा रहा है जहां स्थानीय निवासियों को हथियारों की समझ और सामूहिक सुरक्षा अभ्यास कराया जा रहा है.
सुरक्षा या सामाजिक जागरूकता?
टेलीविजन फुटेज में देखा गया है कि इन ट्रेनिंग सत्रों में पूरे परिवार, युवा और किशोर बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. ईरान सरकार का तर्क है कि इस अभूतपूर्व कदम से आम जनता के बीच सुरक्षात्मक जागरूकता बढ़ेगी और देश की आंतरिक एवं सामाजिक सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक आम नागरिकों और बच्चों को इस तरह हथियार सौंपने और ट्रेनिंग देने को मध्य पूर्व में गहराते संकट और युद्ध के खतरनाक विस्तार के रूप में देख रहे हैं.


