ड्रोन हमले से अबू धाबी स्थित बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र में लगी आग

यूएई के बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहर ड्रोन हमले से जनरेटर में आग लग गई, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ और विकिरण स्तर सामान्य रहे. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात के अल धाफरा क्षेत्र स्थित बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहर रविवार को संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद आग लगने की घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है. संयंत्र की आंतरिक सुरक्षा सीमा के बाहर लगे एक विद्युत जनरेटर को ड्रोन ने निशाना बनाया, जिसके बाद वहां आग भड़क उठी. हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और परमाणु संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी कोई असर नहीं पड़ा.

अधिकारियों ने क्या कहा? 

संघीय परमाणु विनियमन प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि विकिरण स्तर पूरी तरह सामान्य हैं और संयंत्र की सभी मुख्य प्रणालियां सुरक्षित तरीके से काम कर रही हैं. अधिकारियों ने बताया कि आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया और स्थिति नियंत्रण में है. फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे कौन जिम्मेदार है, क्योंकि यूएई प्रशासन ने किसी संगठन या देश का नाम नहीं लिया है.

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. हाल के महीनों में संयुक्त अरब अमीरात में कई बार मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं. यूएई अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ हमले ईरान समर्थित तत्वों की ओर से किए गए थे, जिनका निशाना ऊर्जा परियोजनाएं और समुद्री ढांचा थे.

बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर यह पहला हमला माना जा रहा है. अबू धाबी के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में सऊदी अरब की सीमा के करीब स्थित यह संयंत्र चार परमाणु रिएक्टरों से लैस है. दक्षिण कोरिया के सहयोग से तैयार इस परियोजना पर करीब 20 अरब डॉलर की लागत आई थी और इसे वर्ष 2020 में शुरू किया गया था. बरकाह संयंत्र फिलहाल पूरे अरब प्रायद्वीप का पहला और इकलौता सक्रिय परमाणु ऊर्जा केंद्र है.

विशेषज्ञों का क्या मानना है? 

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में परमाणु संयंत्र भी युद्ध और संघर्ष की रणनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी परमाणु ठिकानों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी थी. इसी तरह अमेरिका-ईरान टकराव के बीच तेहरान कई बार यह दावा कर चुका है कि उसके बुशहर परमाणु संयंत्र को निशाना बनाया गया. हालांकि वहां किसी तरह के रेडियोधर्मी रिसाव की पुष्टि नहीं हुई थी.

बरकाह पर हुए इस ताजा हमले का समय भी काफी अहम माना जा रहा है. दरअसल, यूएई इन दिनों एक नई तेल पाइपलाइन परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. इस परियोजना का उद्देश्य देश की तेल निर्यात क्षमता को बढ़ाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करना है. अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सरकारी तेल कंपनी ADNOC को इस परियोजना का काम तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं.

नई पाइपलाइन के जरिए फुजैराह बंदरगाह से तेल निर्यात क्षमता लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है. बताया जा रहा है कि यह परियोजना अगले वर्ष तक शुरू हो सकती है. खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर खतरे को देखते हुए यूएई इस परियोजना को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है.

वहीं दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित किया है. अमेरिका द्वारा पिछले महीने सैन्य कार्रवाई रोकने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिविधियों को सीमित कर दिया है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की सप्लाई का प्रमुख मार्ग माना जाता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिख रहा अवरोध का असर

इस अवरोध का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में साफ दिखाई दे रहा है. तेल आपूर्ति बाधित होने से कीमतों में तेज उछाल आया है और कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताएं भी फिलहाल ठप पड़ी हुई हैं. दोनों देशों ने एक-दूसरे के नए प्रस्तावों को खारिज कर दिया है, जिससे युद्धविराम और शांति समझौते की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं.

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