तीन घंटों में बदला खेल, ट्रंप की मंजूरी से ईरान पर बरसा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का कहर

वॉशिंगटन से तेहरान तक तीन घंटे की कहानी ने दुनिया हिला दी। बातचीत चल रही थी। कैमरों के सामने संयम था। पर परदे के पीछे फैसला हो चुका था। यही इनसाइड स्टोरी है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

27 फरवरी की दोपहर थी। ट्रंप व्हाइट हाउस से टेक्सास के लिए निकले। रिपोर्टरों ने सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि ईरान से बातचीत से खुश नहीं हैं। लेकिन फैसला नहीं लिया है। यह बयान 12:25 बजे आया। लगभग तीन घंटे बाद तस्वीर बदल गई। 3:38 बजे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को मंजूरी मिल गई।

क्या हिचकिचाहट थी या रणनीति?

एयर फोर्स वन आसमान में था। अंदर छोटी मीटिंग चल रही थी। कुछ रिपब्लिकन सांसद साथ थे। टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन और टेड क्रूज भी मौजूद थे। चर्चा हुई कि तेहरान बातचीत को खींच रहा है। आम राय बनी कि सख्त संदेश जरूरी है। हिचकिचाहट खत्म हुई। हरी झंडी मिल गई।

क्या पेंटागन पहले से तैयार?

जनरल डैन केन ने बाद में बताया कि आदेश मिलते ही तैयारी शुरू हो गई। एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हुए। पायलटों ने स्ट्राइक पैकेज दोहराया। हथियार लोड किए गए। दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप आगे बढ़े। USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford लॉन्च पॉइंट की ओर रवाना हुए। सब कुछ पहले से प्लान था।

क्या टेक्सास लैंडिंग भी संकेत थी?

शाम 4:03 बजे ट्रंप टेक्सास में उतरे। फिर मीडिया से बोले। कहा कि बातचीत से संतुष्ट नहीं हैं। लेकिन सैन्य कार्रवाई पर कुछ नहीं बताया। उन्होंने मुस्कराकर कहा कि इतिहास की बड़ी खबर मिलती तो कैसा लगता। उस वक्त ऑपरेशन की घड़ी चल रही थी। आधी रात के बाद हमला शुरू होना था।

क्या ऑपरेशन था चारों तरफ से?

28 फरवरी की सुबह 1:15 बजे हमला शुरू हुआ। जमीन, हवा, समुद्र और साइबर चारों मोर्चों पर वार हुआ। हजारों सैनिक तैनात थे। सैकड़ों लड़ाकू विमान शामिल थे। खुफिया एजेंसियों ने लोकेशन तय की थी। मिशन का मकसद ईरान की सैन्य ताकत तोड़ना था। इसे तेज और सटीक रखा गया।

क्या तेहरान में मचा हड़कंप?

तेहरान में कई जगह धमाके हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 40 वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल बताए गए। रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडर भी निशाने पर थे। कुछ घंटों बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की। कहा कि ईरानी नेतृत्व बच नहीं सका।

क्या दुनिया नई दिशा में?

यह कार्रवाई तब हुई जब परमाणु वार्ता चल रही थी। अचानक हमला क्यों हुआ, यही बड़ा सवाल है। अमेरिका का तर्क है कि देरी हो रही थी। समर्थकों का कहना है कि सख्ती जरूरी थी। आलोचकों को डर है कि इससे बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। लेकिन एक बात साफ है। तीन घंटे ने इतिहास मोड़ दिया।

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