ईरान युद्ध को बताया ‘ईश्वर की योजना’, अमेरिकी सेना में ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप को ‘जीसस का चुना’ कहा गया

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अमेरिकी सेना के अंदर एक नई बहस छिड़ गई है। आरोप है कि एक सैन्य अधिकारी ने ब्रीफिंग में डोनाल्ड ट्रंप को जीसस द्वारा चुना हुआ बताया।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

अमेरिकी सेना के अंदर एक विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान से जुड़े युद्ध ब्रीफिंग के दौरान धार्मिक बातें कही गईं। कुछ सैनिकों ने आरोप लगाया है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने युद्ध को ईश्वर की योजना बताया। बताया गया कि यह बात एक आधिकारिक मीटिंग में कही गई। इससे कई सैनिक असहज हो गए। मामला सामने आने के बाद चर्चा तेज हो गई है। अब इस पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या ट्रंप को ‘जीसस का चुना हुआ’ बताया गया?

रिपोर्ट के अनुसार उस ब्रीफिंग में डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र भी किया गया। आरोप है कि अधिकारी ने कहा कि ट्रंप को जीसस ने चुना है। यह भी कहा गया कि ईरान में चल रहा संघर्ष ईश्वर की योजना का हिस्सा है। सैनिकों का कहना है कि यह बात सैन्य बैठक में कही गई। इससे कई लोगों ने आपत्ति जताई। क्योंकि सेना में ऐसी धार्मिक टिप्पणी को संवेदनशील माना जाता है।

आखिर शिकायत किसने की?

इस मामले की जानकारी मिलिट्री रिलिजियस फ्रीडम फाउंडेशन नाम की संस्था ने दी है। यह संस्था सेना में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर काम करती है। संस्था का कहना है कि उन्हें कई सैनिकों से शिकायतें मिली हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 200 सैनिकों ने चिंता जताई है। ये सैनिक अलग-अलग सैन्य ठिकानों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

क्या बाइबल के उद्धरण भी दिए गए?

शिकायत में कहा गया है कि उस बैठक में बाइबल का भी जिक्र हुआ। खास तौर पर ‘बुक ऑफ रिवेलेशन’ का हवाला दिया गया। यह बाइबल का आखिरी हिस्सा है। इसमें दुनिया के अंतिम युद्ध यानी आर्मगेडन की बात होती है। सैनिकों का आरोप है कि अधिकारी ने इसी संदर्भ में ईरान युद्ध को जोड़ा। इससे कई लोग हैरान रह गए।

क्या सैनिकों ने जताई नाराजगी?

कुछ सैनिकों ने कहा कि सेना में इस तरह की भाषा ठीक नहीं है। उनका मानना है कि युद्ध और धर्म को इस तरह जोड़ना ठीक नहीं। कई सैनिकों ने अपनी पहचान गुप्त रखकर शिकायत की है। एक नॉन-कमिशन्ड ऑफिसर ने भी अपनी यूनिट की ओर से बयान दिया है। उसने कहा कि ऐसी टिप्पणियां सैनिकों के बीच असहज माहौल बना सकती हैं।

क्या विशेषज्ञों ने जताई चिंता?

इस मामले पर विशेषज्ञों ने भी प्रतिक्रिया दी है। मिलिट्री रिलिजियस फ्रीडम फाउंडेशन के अध्यक्ष माइकी वाइनस्टीन ने इस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा खतरनाक हो सकती है। उनके मुताबिक इससे कट्टरपंथी संगठनों को प्रचार का मौका मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव भी बढ़ सकता है।

क्या इससे बढ़ सकता है विवाद?

अमेरिका-ईरान संघर्ष पहले ही संवेदनशील स्थिति में है। ऐसे समय में सेना के अंदर इस तरह की बातें सामने आना नया विवाद पैदा कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि सेना को राजनीतिक और धार्मिक विवादों से दूर रहना चाहिए। फिलहाल यह मामला चर्चा में है। आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

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