ट्रंप का खतरनाक प्लान! अब कभी नहीं खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? ईरान की अर्थव्यवस्था पर आया भयंकर संकट
ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक नया प्लान बनाने का सोचा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लंबे समय तक नाकेबंदी बनाए रखने का फैसला किया है.

नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है. पिछले दो महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनावपूर्ण स्थिति के कारण यह रास्ता लगभग बंद पड़ा है. इससे जहाजों की आवाजाही रुक गई है और कई देशों में ईंधन की कमी गहरी होती जा रही है. अब खबर है कि यह रास्ता जल्दी खुलने वाला नहीं है.
ट्रंप का लंबा घेराबंदी प्लान
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लंबे समय तक नाकेबंदी बनाए रखने का फैसला किया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप अपने अधिकारियों को ‘लॉन्ग-टर्म सीज’ यानी लंबी घेराबंदी के लिए तैयार रहने के निर्देश दे चुके हैं.
ट्रंप ने शुरू में दो अन्य विकल्पों पर विचार किया था कि या तो ईरान पर फिर से हमले शुरू करना या युद्ध को पूरी तरह खत्म कर देना, लेकिन दोनों विकल्पों में ज्यादा खतरा दिखने के बाद उन्होंने आर्थिक दबाव की रणनीति चुनी. नाकेबंदी जारी रखकर ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना उनका मुख्य लक्ष्य है.
ईरान पर बढ़ रहा है आर्थिक दबाव
ईरान का तेल निर्यात मुख्य रूप से इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होता है. अमेरिका की नाकेबंदी के कारण ईरान के तेल टैंकरों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है. इससे ईरान की आमदनी पर भारी असर पड़ रहा है. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि सीधे युद्ध से बचते हुए नाकेबंदी के जरिए ईरान पर दबाव बनाए रखना एक बेहतर रणनीति है.
निर्यात रुकने से ईरान के पास तेल जमा हो गया है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान के पास अब सिर्फ 12 से 22 दिनों का ही स्टोरेज बचा है. जैसे-जैसे जगह खत्म होगी, ईरान को अपना तेल उत्पादन कम करना पड़ सकता है, जिससे उसकी सरकार की आय और भी घट जाएगी. स्थिति से निपटने के लिए ईरान ने अपने पुराने और बंद पड़े टैंकरों को फिर से इस्तेमाल में लाना शुरू कर दिया है.
ईरान का प्रस्ताव और ट्रंप की प्रतिक्रिया
ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है. इसमें कहा गया है कि अगर अमेरिका नाकेबंदी हटा ले तो ईरान भी कुछ प्रतिबंध हटा सकता है और अस्थायी युद्ध विराम पर बात हो सकती है. ईरान का कहना है कि स्थिति सामान्य होने के बाद ही परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा की जा सकती है. हालांकि ट्रंप इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं. वे परमाणु मुद्दे को पहले सुलझाना चाहते हैं.


