डील होगी या छिड़ेगा युद्ध? होर्मुज संकट के बीच ट्रंप के एक बयान से बढ़ा वैश्विक तनाव, ईरान के सामने रखा आखिरी विकल्प

मिडल ईस्ट में जारी भीषण भू-राजनीतिक उथल-पुथल और युद्ध के बादलों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते को लेकर वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सुगबुगाहट बेहद तेज हो गई है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: मिडल ईस्ट में जारी भीषण भू-राजनीतिक उथल-पुथल और युद्ध के बादलों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते को लेकर वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सुगबुगाहट बेहद तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त और दोटूक संदेश जारी किया है.

ईरान अमेरिका का समझौता

ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान अब अमेरिका के साथ हर हाल में समझौता करना चाहता है लेकिन अमेरिकी प्रशासन फिलहाल ईरान द्वारा पेश किए गए मौजूदा प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं है. व्हाइट हाउस में आयोजित एक हाई-लेवल कैबिनेट बैठक के बाद ट्रंप ने साफ संकेत दिया कि पर्दे के पीछे बातचीत के रास्ते जरूर खुले हैं लेकिन अगर तेहरान ने शर्तों को नहीं माना तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुनने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेगा.

चुनावों के दबाव में नहीं झुकेगा अमेरिका

कैबिनेट बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ईरान इस समय अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय दबाव में है. वह बहुत शिद्दत से हमारे साथ डील करना चाहता है. अभी तक बातचीत किसी मुकम्मल नतीजे पर नहीं पहुंची है. जब तक अमेरिका पूरी तरह संतुष्ट नहीं होगा किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे.

अगर बात नहीं बनी तो हमारी कार्रवाई के लिए ईरान तैयार रहे. इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के उस भ्रम को भी तोड़ा जिसमें तेहरान को लग रहा था कि अमेरिका आगामी मध्यावधि चुनावों के घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण पीछे हट जाएगा. ट्रंप ने कहा कि उनकी विदेश नीति और सैन्य रणनीतियां चुनावों से प्रभावित नहीं होती हैं.

 व्हाइट हाउस ने बताया फर्जी

ईरानी सरकारी मीडिया ने एक सनसनीखेज रिपोर्ट में दावा किया था कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे एक प्रारंभिक समझौते का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है. अमेरिका ईरान के खिलाफ लगाई गई कड़क नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने और फारस की खाड़ी से अपनी सैन्य मौजूदगी को कम करने पर सहमत हो गया था.

इसके एवज में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही को बिना किसी बाधा के सामान्य करने को तैयार था. व्हाइट हाउस ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ईरानी मीडिया द्वारा प्रचारित किया जा रहा कथित समझौता पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी है.

क्या है यूरेनियम का विवाद?

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की 'आर्थिक जीवन रेखा' माना जाता है क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है. इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम है. अमेरिका की सख्त शर्त है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह नष्ट करे. ईरान के पास वर्तमान में 60 फीसदी तक एनरिच्ड करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का खतरनाक भंडार मौजूद है जो परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब है. अमेरिका इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती मान रहा है.

कैसे उलझा ये मामला

इस संभावित डील के आड़े लेबनान और हिजबुल्ला का मुद्दा भी आ रहा है. ईरान की मांग है कि किसी भी क्षेत्रीय सीजफायर समझौते में लेबनान को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए. इस्राइल ने साफ कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. इस्राइली प्रधानमंत्री ने लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ सैन्य अभियानों को और अधिक आक्रामक करने का ऐलान किया है जिससे इस पूरे रीजन में पूर्ण युद्ध छिड़ने का खतरा और गहरा गया है.

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