पाकिस्तान में Gen-Z की बगावत, इन मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ फूंका बिगुल

नेपाल की तरह अब पाकिस्तान में भी Gen-Z ने सरकार के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजा दिया है. हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद एक बार फिर असंतोष की लहर उठ चुकी है. इस बार आंदोलन की अगुवाई युवा छात्रों ने की है, जो शिक्षा में सुधार की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए हैं.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्ली: नेपाल की तरह अब पाकिस्तान में भी Gen-Z ने सरकार के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजा दिया है. हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद एक बार फिर असंतोष की लहर उठ चुकी है. इस बार आंदोलन की अगुवाई युवा छात्रों ने की है, जो शिक्षा में सुधार की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए हैं. पहले फीस वृद्धि के विरोध में आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन अब धीरे-धीरे शहबाज सरकार के खिलाफ एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है. 

क्यों फूटा छात्रों का गुस्सा

छात्रों का गुस्सा खासकर, नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (ई-मार्किंग) को लेकर है, जिसे इस साल मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर पर लागू किया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 अक्टूबर को छह महीने की देरी से घोषित इंटरमीडिएट फर्स्ट ईयर के नतीजों में बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं. कई छात्रों को बहुत कम अंक मिले, जबकि कुछ को उन विषयों में पास दिखा दिया गया, जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं थी. इस कारण छात्रों में भारी नाराजगी फैल गई.

सरकार का बयान नहीं आया

आपको बता दें कि इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया, लेकिन मीरपुर एजुकेशन बोर्ड ने ई-मार्किंग प्रणाली की जांच के लिए एक समिति बना दी है. छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक है कि पुनर्मूल्यांकन शुल्क (Re-evaluation Fee) को खत्म किया जाए, क्योंकि वर्तमान में यह शुल्क प्रति विषय 1500 रुपये है. सात विषयों के लिए यह कुल 10,500 रुपये तक पहुंच जाता है, जो गरीब परिवारों के छात्रों के लिए बहुत बड़ी रकम है.

प्रमुख शहरों में आंदोलन

यह आंदोलन अब केवल पीओके तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाहौर जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंच गया है. पिछले महीने इंटरमीडिएट के छात्रों ने लाहौर प्रेस क्लब के बाहर भी धरना प्रदर्शन किया था. इस आंदोलन को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का समर्थन मिल रहा है, जो अक्टूबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों में भी सक्रिय थी.

जब झुकी पाकिस्तान सरकार

करीब एक महीने पहले पीओके में 30 मांगों को लेकर एक बड़ा विरोध-आंदोलन हुआ था, जिसमें टैक्स में राहत, आटा और बिजली पर सब्सिडी व  विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने जैसी मांगें शामिल थीं.  उस समय हुई हिंसा में 12 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.  पाकिस्तानी सेना ने गोलियां चलाकर प्रदर्शन दबाने की कोशिश की, लेकिन यह आंदोलन सेना प्रमुख आसिम मुनीर की नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ बगावत में बदल गया था. आखिर सरकार को आंदोलनकारियों से बातचीत कर कुछ मांगें माननी पड़ी थी. 

विशेषज्ञ क्या बोले

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौर बेहद संवेदनशील है, क्योंकि नेपाल में भी इसी तरह युवाओं के नेतृत्व में आंदोलन ने केपी शर्मा ओली सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था. वहां सोशल मीडिया पर रोक के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन भ्रष्टाचार विरोधी जनक्रांति में बदल गया था. उसी तरह PoK में भी यह आग शिक्षा के मुद्दों से शुरू होकर सत्ता परिवर्तन तक पहुंचने की संभावना दिखा रही है.

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