भारत क्यों आ रहे हैं ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची? जानिए वजह
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के भारत आने की संभावना है, जो भारत-ईरान संबंधों की मजबूती का संकेत है.

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से पहले भारत की कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. इसी क्रम में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के भारत दौरे की संभावना जताई जा रही है. खबरों के मुताबिक, वह नई दिल्ली में 14 और 15 मई को आयोजित होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने आ सकते हैं. इस साल भारत ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है और ऐसे में यह बैठक वैश्विक स्तर पर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
अराघची की यात्रा बढ़ते रणनीतिक संबंधों का संकेत
अराघची की संभावित यात्रा भारत और ईरान के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का संकेत मानी जा रही है. खासतौर पर तब, जब ईरान हाल ही में विस्तारित ब्रिक्स समूह का हिस्सा बना है. 2024 में ईरान के साथ मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को भी इस संगठन में शामिल किया गया था, जिससे समूह की वैश्विक ताकत और प्रभाव में इजाफा हुआ है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच लगातार उच्चस्तरीय संपर्क भी बना हुआ है. फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद से ईरानी विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है. इन चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.
अराघची इससे पहले मई 2025 में भारत-ईरान संयुक्त आयोग की बैठक में भाग लेने भारत आए थे. विदेश मंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा था. अब उनका संभावित दूसरा दौरा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती देने वाला माना जा रहा है.
रूसी विदेश मंत्री बैठक में होंगे शामिल
इस बैठक में रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव शामिल होंगे. रूसी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि वह 14 और 15 मई को भारत में मौजूद रहेंगे. इससे साफ है कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की यह बैठक वैश्विक राजनीति के लिहाज से अहम मंच बनने जा रही है.
भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्राजील से ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी. यह चौथी बार है जब भारत इस समूह का नेतृत्व कर रहा है. इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की मेजबानी कर चुका है.
इस बार भारत ने अपनी अध्यक्षता का विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखा है. यह थीम विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, वैश्विक चुनौतियों से निपटने और मानवता-केंद्रित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स आने वाले समय में वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है.


