DRDO की बड़ी कामयाबी, ‘अग्नि’ मिसाइल ने दिखाया मल्टी-टारगेट अटैक पावर, भारत ने बढ़ाई अपनी परमाणु ताकत

भारत ने MIRV तकनीक से लैस एडवांस्ड ‘अग्नि’ मिसाइल का सफल परीक्षण कर अपनी रक्षा ताकत को और मजबूत किया है. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किए गए इस टेस्ट में मिसाइल ने एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता दिखाई.

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Edited By: JBT Desk

नई दिल्ली: भारत ने MIRV टेक्नोलॉजी से लैस एक एडवांस्ड 'अग्नि' मिसाइल का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा करके अपनी रक्षा क्षमताओं को काफी मजबूत किया है. इस मिसाइल में हिंद महासागर क्षेत्र में एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता है. यह परीक्षण 8 मई को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया था.

इस मिसाइल का परीक्षण DRDO द्वारा किया गया, जिसमें अत्याधुनिक MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था. इस परीक्षण की एक मुख्य बात यह थी कि कई पेलोड ले जा रही इस मिसाइल ने हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर स्थित कई अलग-अलग लक्ष्यों पर सफलतापूर्वक हमला किया. MIRV टेक्नोलॉजी की मदद से एक ही मिसाइल अलग-अलग दिशाओं में स्थित कई लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम हो जाती है.

हिंद महासागर में कई लक्ष्यों पर हमला
इस मिसाइल का परीक्षण शुक्रवार को ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया था. परीक्षण के दौरान, मिसाइल के कई पेलोड ने हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के भीतर एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र में फैले विभिन्न लक्ष्यों पर सटीक हमला किया.

यह उड़ान परीक्षण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रणनीतिक बल कमान (SFC) के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक पूरा किया गया. इस मिसाइल को कई पेलोड के साथ कॉन्फ़िगर किया गया था जो हिंद महासागर क्षेत्र में एक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैले विभिन्न लक्ष्यों को स्वतंत्र रूप से निशाना बनाने में सक्षम थे. टेलीमेट्री, रडार और जहाज-आधारित स्टेशनों ने मिशन के सभी उद्देश्यों के सफल पूरा होने की पुष्टि की. 

MIRV टेक्नोलॉजी की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

इस सफल परीक्षण ने एक ही मिसाइल प्रणाली का उपयोग करके कई रणनीतिक लक्ष्यों पर हमला करने की भारत की क्षमता को साबित कर दिया है. एक मिसाइल, कई हमले: MIRV टेक्नोलॉजी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता एक ही मिसाइल पर कई वॉरहेड (पेलोड) ले जाने की इसकी क्षमता है.

यह अलग-अलग जगहों पर स्थित लक्ष्यों को एक साथ और सटीक रूप से निशाना बनाने और नष्ट करने में सक्षम बनाती है. इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की विभिन्न प्रयोगशालाओं ने देश भर के उद्योगों की मदद से विकसित किया है. शुक्रवार को किए गए इस ऐतिहासिक परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मौके पर मौजूद थे.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी

इस बड़ी उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय सेना और इस परियोजना से जुड़े औद्योगिक भागीदारों को बधाई दी है. रक्षा मंत्री ने कहा कि, बदलते सुरक्षा परिदृश्यों और लगातार बढ़ते खतरों के बीच यह सफलता भारत की रक्षा तैयारियों में "अतुलनीय क्षमता" जोड़ेगी.

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