मां के प्यार को सलाम, जानिए इस खास दिन का इतिहास, महत्व और सेलिब्रेशन का तरीका
मदर्स डे उन सभी रिश्तों को सेलिब्रेट करने का खास अवसर है जिन्हे हम कभी थैंक्यू नही कहते है. कई लोग इस दिन अपनी दादी, नानी, मौसी, बुआ को धन्यवाद कहते हैं. मदर्स डे हमें उन सभी रिश्तों की अहमियत याद दिलाता है

नई दिल्ली: मदर्स डे उन सभी रिश्तों को सेलिब्रेट करने का खास अवसर है जिन्हे हम कभी थैंक्यू नही कहते है. कई लोग इस दिन अपनी दादी, नानी, मौसी, बुआ को धन्यवाद कहते हैं. मदर्स डे हमें उन सभी रिश्तों की अहमियत याद दिलाता है, जिनमें ममता, अपनापन और निस्वार्थ प्रेम छिपा होता है.
हर देश का सेलिब्रेशन स्टाइल अलग हो सकता है लेकिन इमोशन एक ही रहता है, मां के प्रति रिस्पेक्ट, ग्रैटिट्यूड और लव. धीरे-धीरे 'मदर्स डे' पूरे संयुक्त राज्य अमेरिका में लोकप्रिय होने लगा. हालांकि बाद में अन्ना जार्विस इस बात से दुखी हो गई कि 'मदर्स डे' बहुत ज्यादा कमर्शियल होता जा रहा था.
जानें कि मदर्स डे की शुरुआत कैसे हुई
हर देश का सेलिब्रेशन स्टाइल अलग हो सकता है लेकिन इमोशन एक ही रहता है, मां के प्रति रिस्पेक्ट, ग्रैटिट्यूड और लव. धीरे-धीरे 'मदर्स डे' पूरे संयुक्त राज्य अमेरिका में लोकप्रिय होने लगा. हालांकि बाद में अन्ना जार्विस इस बात से दुखी हो गई कि 'मदर्स डे' बहुत ज्यादा कमर्शियल होता जा रहा था. 1905 में अपनी मां की मौत होने के बाद अन्ना जार्विस ने इस दिन की शुरुआत की. उन्होंने लगातार अभियान चलाए और लोगों को जागरूक किया.
1914 में मिली मान्यता
मदर्स डे की कहानी बेहद इमोशनल है. यह तारीख इतनी लोकप्रिय हो गई कि इसे स्थायी रूप से अपना लिया गया. एना जार्विस ने कई वर्षों तक अभियान चलाया. 1914 में अमेरिकी सरकार ने इसे मान्यता दी. सरकार के मान्यता देने के बाद यह दिन हर साल मनाया जाने लगा. धीरे-धीरे अन्य देशों ने भी इसे अपना लिया.
महत्व
मदर्स डे मां द्वारा किए गए बलिदानों के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का एक अवसर है. यह परिवारों के पालन-पोषण और समाज में उनके योगदान की भूमिका को उजागर करता है. यह दिन लोगों को रुककर उन अनगिनत बलिदानों साथ ही बिना शर्त किए गए भावनात्मक और शारीरिक प्रयासों को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करता है, जो मां, दादी-नानी, मौसी-बुआ और देखभाल करने वाले लोग अपने रिस्तेदारों के पालन-पोषण में लगाते हैं.


