कतर के पूर्व अमीर शेख हमद का हुआ निधन: भारत सरकार ने किया एक दिन के राजकीय शोक का ऐलान

भारत ने सोमवार को कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।

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नई दिल्ली: भारत सरकार ने कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर सोमवार को एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया। 74 साल के शेख हमद का रविवार को निधन हो गया। कतर सरकार ने मौत की वजह नहीं बताई।  

विदेश मंत्रालय ने कहा कि शेख हमद ने कतर को खाड़ी के एक छोटे से देश से वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक ताकत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके सम्मान में भारत ने 13 जुलाई 2026 को शोक का ऐलान किया।  

सरकार ने क्या फैसले लिए?   

MEA के बयान के अनुसार शोक के दिन पूरे देश में सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। साथ ही कोई भी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम नहीं होगा। मंत्रालय ने बताया कि संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की तरफ से संवेदना जताने के लिए कतर जा सकते हैं।  

PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि      

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर पोस्ट कर शेख हमद को दूरदर्शी नेता बताया। उन्होंने लिखा, "हमें कतर के फादर अमीर महामहिम शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन से गहरा दुख है। उन्होंने कतर को विकास और समृद्धि की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।"  

PM ने कहा कि उनसे फरवरी 2024 में कतर यात्रा के दौरान मुलाकात का सौभाग्य मिला था। मोदी ने कतर के मौजूदा अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, शाही परिवार और कतर की जनता के प्रति संवेदना जताते हुए कहा, "ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।"  

कतर को बदलने वाले नेता   

शेख हमद ने 1995 में सत्ता संभाली थी और 18 साल तक कतर पर राज किया। इस दौरान उन्होंने देश का नक्शा ही बदल दिया। उनका सबसे बड़ा योगदान कतर के LNG सेक्टर को खड़ा करना था। भारी निवेश के जरिए उन्होंने कतर को दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस निर्यातक बना दिया।

ऊर्जा से आई दौलत ने कतर को ग्लोबल इकॉनमी में अहम जगह दिलाई। दोहा में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और मीडिया पर भी उनका फोकस रहा। अल जजीरा जैसे प्लेटफॉर्म और बड़े-बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स उनके दौर की पहचान बने। 2013 में शेख हमद ने खुद पद छोड़कर सत्ता अपने बेटे शेख तमीम को सौंप दी।

उन्होंने कहा था कि अब नई पीढ़ी को नए विचारों के साथ आगे आना चाहिए। भारत और कतर के रिश्ते भी उनके कार्यकाल में मजबूत हुए। ऊर्जा, व्यापार और प्रवासी भारतीयों के मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी बनी। इसी वजह से भारत ने उनके निधन पर राजकीय शोक की घोषणा की है।   First Updated : Sunday, 12 July 2026