तेल-गैस के बाद अब इंटरनेट पर खतरा: हॉर्मुज और लाल सागर में तनाव बढ़ा तो रुक सकती है दुनिया की डिजिटल सांस भी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अब इंटरनेट पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगर समुद्री केबल प्रभावित हुए तो भारत समेत दुनिया की डिजिटल सेवाएं ठप हो सकती हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

मध्य पूर्व में चल रही जंग ने अब एक नया खतरा पैदा कर दिया है। पहले तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा। अब इंटरनेट पर भी संकट की आशंका जताई जा रही है। हॉर्मुज और लाल सागर जैसे अहम समुद्री रास्ते चर्चा में हैं। ये वही इलाके हैं जहां से दुनिया का बड़ा डेटा गुजरता है। अगर यहां कोई नुकसान हुआ तो असर पूरी दुनिया पर दिखेगा।

क्यों खास हैं ये समुद्री रास्ते?

दो जगहें सबसे ज्यादा अहम मानी जा रही हैं। पहली हॉर्मुज जलडमरूमध्य और दूसरी लाल सागर का बाब-अल-मंदेब मार्ग। इन दोनों के नीचे फाइबर ऑप्टिक केबलों का बड़ा नेटवर्क बिछा है। ये केबल यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ते हैं। यानी दुनिया का इंटरनेट इन्हीं रास्तों से चलता है। इसलिए यहां खतरा बढ़ना बड़ी चिंता है।

क्या ईरान की रणनीति बढ़ा रही डर?

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने हॉर्मुज में समुद्री सुरंगें बिछाई हैं। इससे शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां सतर्क हो गई हैं। दूसरी तरफ लाल सागर में हूथी समूह जहाजों को निशाना बना रहे हैं। ये दोनों इलाके उन्हीं केबलों के ऊपर हैं जिनसे इंटरनेट चलता है। ऐसे में खतरा और बढ़ जाता है।

क्या इन केबलों पर निर्भर है दुनिया?

समुद्र के नीचे बिछी ये पतली केबलें बेहद अहम हैं। इन्हीं के जरिए वीडियो कॉल, ईमेल और बैंकिंग सेवाएं चलती हैं। एआई और क्लाउड सेवाएं भी इन्हीं पर टिकी हैं। अगर इनमें कोई खराबी आई तो पूरी डिजिटल दुनिया प्रभावित होगी। यानी इंटरनेट रुकना सिर्फ कनेक्शन का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था का सवाल है।

कितनी केबलें हैं खतरे में?

लाल सागर और हॉर्मुज क्षेत्र में करीब 20 केबल मौजूद हैं। इनमें से 17 केबल लाल सागर से गुजरती हैं। हॉर्मुज में भी कई अहम लाइनें हैं जैसे AAE-1, फाल्कन और टाटा-टीजीएन। ये सभी भारत के डेटा कनेक्शन के लिए जरूरी हैं। अगर इनमें से कोई भी प्रभावित हुई तो असर सीधा भारत पर पड़ेगा।

क्या भारत पर पड़ेगा असर?

भारत की डिजिटल सेवाएं भी इन केबलों पर निर्भर हैं। बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बड़े डेटा सेंटर भी इन्हीं से जुड़े हैं। अगर कनेक्शन धीमा या बंद हुआ तो आम लोगों से लेकर कंपनियों तक असर दिखेगा। यह सिर्फ तकनीकी नहीं, आर्थिक संकट भी बन सकता है।

क्या दुनिया के लिए बढ़ रही चिंता?

मध्य पूर्व का यह तनाव अब वैश्विक चिंता बन चुका है। अगर हालात बिगड़े तो सिर्फ तेल ही नहीं, इंटरनेट भी प्रभावित होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आधुनिक दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। क्योंकि आज की दुनिया पूरी तरह डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर है। ऐसे में एक छोटी चूक भी बड़े संकट में बदल सकती है।

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