खत्म हुआ ईरान का सबसे लंबा शासन! खामेनेई की मौत के बाद अब कौन होगा नया उत्तराधिकारी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई. इस दावे से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है और उत्तराधिकार को लेकर सस्पेंस गहरा गया है.

तेहरान: मध्य पूर्व से आई एक चौंकाने वाली खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है. ट्रंप के अनुसार, यह घटना तेहरान में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद हुई. उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में खामेनेई को इतिहास के सबसे खतरनाक नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि उनकी मौत ईरान की जनता के लिए एक नया अवसर है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की निगरानी से खामेनेई बच नहीं सके. ट्रंप के मुताबिक, ईरान पर की जा रही बमबारी अभी खत्म नहीं हुई है और आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है.
तेहरान में हालात तनावपूर्ण
ईरानी सरकारी मीडिया ने भी ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी है. सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA और मुख्य समाचार चैनल 'प्रेस टीवी' (Press TV) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में खामेनेई शहीद हो गए हैं. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने बयान में खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी.
वहीं, खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन के सार्वजनिक शोक की घोषणा की गई है. 86 वर्षीय अली खामेनेई वर्ष 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे. वे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद इस पद पर पहुंचने वाले दूसरे नेता थे. लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण उनका प्रभाव ईरान की राजनीति, विदेश नीति और सैन्य रणनीति पर गहरा रहा.
कौन होगा अगला उत्तराधिकार?
खामेनेई के निधन की खबर के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगला सर्वोच्च नेता कौन होगा. ईरान के संविधान के अनुसार, 88 सदस्यीय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ नए नेता का चयन करती है. इस प्रक्रिया में कई वरिष्ठ धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के नाम चर्चा में हैं.
इनमें आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी, मोहसिन कौमी, मोहसिन अराकी, जी.एच. मोहसेनी एजेई और हाशमे हुसैनी बुशेहरी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि नए नेता के चयन को लेकर अंदरूनी खींचतान भी हो सकती है, जिससे देश की आंतरिक राजनीति प्रभावित हो सकती है.
ईरान पहले से ही इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों के साथ तनावपूर्ण स्थिति में है. अगर नेतृत्व में बदलाव होता है, तो इससे ईरान की विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय रणनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान के भीतर सत्ता संतुलन और बाहरी संबंधों की दिशा तय करेगी कि मध्य पूर्व का भविष्य किस ओर जाएगा.


