रडार को चकमा देने वाली मिसाइलों के दम पर ईरान का पलटवार, आधी ताकत खत्म फिर भी अमेरिका-इजरायल के सामने डटा तेहरान

  ईरान की मिसाइल ताकत ने युद्ध की दिशा बदल दी है, भारी हमलों के बावजूद उसकी आधी क्षमता बची है और तेहरान अभी भी अमेरिका और इजरायल के सामने मजबूती से खड़ा है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

लगातार हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसकी करीब 50 प्रतिशत ताकत अब भी बरकरार है। यही वजह है कि तेहरान अभी भी मजबूती से जवाब दे रहा है। यह दिखाता है कि ईरान ने लंबे समय से अपने मिसाइल सिस्टम पर गंभीर निवेश किया है।

क्या मिसाइलों ने युद्ध का समीकरण बदल दिया?

ईरान की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर ही बदल दी है। अब सिर्फ पारंपरिक सेना नहीं, बल्कि मिसाइल और ड्रोन तकनीक ही असली ताकत बन गई है। तेहरान ने दुनिया को दिखाया कि कम संसाधनों के बावजूद बड़ी शक्तियों को चुनौती दी जा सकती है।

क्या एयर डिफेंस सिस्टम भी कमजोर पड़ रहे हैं?

अमेरिका और इजरायल के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम भी ईरान की मिसाइलों को पूरी तरह रोक नहीं पा रहे हैं। थाड, आयरन डोम और पैट्रियट जैसे सिस्टम लगातार दबाव में हैं। इससे साफ है कि मिसाइल तकनीक ने रक्षा व्यवस्था को नई चुनौती दे दी है।

क्या ईरान ने नई युद्ध रणनीति अपनाई?

ईरान ने पारंपरिक वायुसेना की कमी को मिसाइल और ड्रोन के जरिए पूरा किया है। उसने अपने हथियारों को सिर्फ हमले के लिए नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया है। यही वजह है कि वह लंबे समय तक युद्ध को खींचने में सफल रहा है।

क्या ईरान के पास बड़ा मिसाइल भंडार है?

अनुमान के मुताबिक ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा है। यह मध्य पूर्व में सबसे बड़ा और विविध मिसाइल स्टॉक माना जाता है। पिछले वर्षों में उसने अपनी मिसाइलों की सटीकता और मारक क्षमता को काफी बढ़ाया है।

क्या हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की मिसाइलें गेम चेंजर बनीं?

ईरान के पास मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ हाइपरसोनिक मिसाइलें भी हैं। ये मिसाइलें तेज गति और भारी वारहेड के साथ लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हैं। इनकी वजह से खाड़ी देशों और इजरायल में बड़ा असर देखा गया है।

क्या युद्ध लंबा खिंच सकता है?

मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि यह युद्ध जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। ईरान की बची हुई ताकत उसे लंबे समय तक लड़ने की क्षमता देती है। अगर संघर्ष जारी रहा तो पूरे मिडिल ईस्ट में इसका असर और गहरा हो सकता है।

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