हिंद महासागर में बड़ा सस्पेंस गहराया, अमेरिकी हमले के बाद श्रीलंका किनारे पहुंचा ईरानी जहाज

हिंद महासागर में तनाव अचानक बढ़ गया है। अमेरिकी हमले में ईरान का युद्धपोत डूबने के बाद एक और ईरानी जहाज श्रीलंका के पास दिखाई दिया। उसने तुरंत बंदरगाह में आने की अनुमति मांगी है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

हिंद महासागर के शांत पानी में हलचल दिखी है। श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने बताया कि एक ईरानी जहाज उनके देश के समुद्री इलाके के पास आकर खड़ा हो गया है। यह जहाज श्रीलंका की एक्सक्लूसिव इकनॉमिक जोन के बाहर है। लेकिन उसने सरकार से तुरंत बंदरगाह में आने की अनुमति मांगी है। सरकार अभी इस पर फैसला नहीं कर पाई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। इस घटना ने इलाके में नई चर्चा शुरू कर दी है।

क्या डूबा युद्धपोत इस कहानी

इस पूरे मामले की शुरुआत एक दिन पहले हुई। अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाया। यह हमला हिंद महासागर में हुआ। उस समय जहाज भारत के विशाखापत्तनम से सैन्य अभ्यास करके लौट रहा था। अचानक टॉरपीडो से हमला हुआ। जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कुछ ही देर में वह समुद्र में डूब गया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया।

क्या हमले में कितने लोग

हमले के बाद सामने आई जानकारी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 87 लोगों की मौत हुई है। श्रीलंका की एजेंसियों ने समुद्र में बचाव अभियान चलाया। कई घंटों तक खोज जारी रही। इस दौरान 32 नाविकों को जिंदा बचाया गया। लेकिन कई लोग अब भी लापता हैं। माना जा रहा है कि वे समुद्र में डूब गए होंगे। यह हादसा बेहद दुखद माना जा रहा है।

क्या अमेरिका ने हमले

इस हमले पर अमेरिका ने भी बयान दिया। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हमले की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन सफल रहा। उनके मुताबिक यह कार्रवाई सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर की गई। अमेरिका ने इसे बड़ी रणनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने मिशन में पूरी तरह सफल रहा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई।

क्या इजराइल भी इसमें

अमेरिका के बयान में एक और अहम बात सामने आई। कहा गया कि यह एक संयुक्त अभियान था। इसमें इजराइल के सहयोग का भी जिक्र किया गया। हालांकि इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई। लेकिन इतना जरूर साफ है कि मामला बड़ा है। यह सिर्फ एक समुद्री घटना नहीं है। इसके पीछे बड़ी रणनीति हो सकती है। इसलिए दुनिया की नजर अब इस इलाके पर टिक गई है।

क्या श्रीलंका सरकार के सामने सबसे मुश्किल सवाल

अब सबसे मुश्किल सवाल श्रीलंका सरकार के सामने है। क्या वह ईरानी जहाज को अपने बंदरगाह में आने देगा। या उसे बाहर ही इंतजार करना पड़ेगा। सरकार अभी हालात का आकलन कर रही है। क्योंकि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकता है। श्रीलंका के लिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इसलिए हर कदम बहुत सोच समझकर उठाया जा रहा है।

क्या हिंद महासागर में

इस पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का नया संकेत है। या फिर यह एक बड़ी रणनीतिक चाल है। फिलहाल इतना तय है कि तनाव बढ़ चुका है। हिंद महासागर अब सिर्फ व्यापार का रास्ता नहीं रहा। यहां अब बड़ी ताकतों की नजर है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे यह देखना अहम होगा।

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