नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदें बढ़ रही हैं, वहीं ईरान के भीतर इसका विरोध भी तेज हो गया है. कई शहरों में कट्टरपंथी समूहों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के खिलाफ प्रदर्शन किए. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रस्तावित समझौता देश के हितों के खिलाफ है और इससे ईरान की रणनीतिक ताकत कमजोर हो सकती है.
शनिवार को ईरान के विभिन्न शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और शांति समझौते के खिलाफ नारेबाजी की. मशहद शहर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भी विरोध का सामना करना पड़ा. प्रदर्शन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी देखी गई. कई लोग काले वस्त्र और लाल झंडे लेकर पहुंचे और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई.
विरोध प्रदर्शनों में अराघची के खिलाफ तीखे नारे लगाए गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी उन्हें इस्तीफा देने की मांग करते दिखाई दिए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते में ईरान की शर्तों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और देश की सुरक्षा तथा सम्मान से कोई समझौता नहीं होना चाहिए.
शांति समझौते के विरोध में खड़े लोगों का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरान को झुकने की जरूरत नहीं है. उनका तर्क है कि लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद अब अमेरिका के साथ जल्दबाजी में समझौता करना उचित नहीं होगा. कुछ समूहों को यह भी आशंका है कि संभावित समझौते से ईरान की क्षेत्रीय स्थिति और रणनीतिक प्रभाव कमजोर पड़ सकता है.
हालांकि, विदेश मंत्री अराघची लगातार यह कह रहे हैं कि वार्ता में ईरान के राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. सरकार का मानना है कि कूटनीतिक समाधान क्षेत्र में स्थिरता और शांति लाने में मदद कर सकता है.
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं. दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन ईरान के अंदर बढ़ते विरोध ने इस प्रक्रिया को और संवेदनशील बना दिया है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों पक्ष किसी अंतिम सहमति तक पहुंच पाते हैं. First Updated : Sunday, 14 June 2026