युद्धविराम की शेष अवधि के लिए वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान

ईरान ने युद्धविराम की अवधि तक होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन को पूरी तरह खुला रखने का ऐलान किया है. यह कदम वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए उठाया गया है, जबकि पहले अमेरिका ने नाकाबंदी की चेतावनी दी थी.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि युद्धविराम की शेष अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग पूरी तरह खुला रहेगा. यह फैसला क्षेत्र में तनाव कम करने और वैश्विक व्यापार को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है.  

अब्बास अराघची ने क्या कहा? 

उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही पहले से तय और समन्वित समुद्री मार्गों के अनुसार ही होगी, जिन्हें ईरान के बंदरगाह एवं समुद्री संगठन द्वारा निर्धारित किया गया है. अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में कहा कि लेबनान में लागू युद्धविराम समझौते के अनुरूप यह कदम उठाया गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से गुजरने की अनुमति दी जाएगी. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि समुद्री यातायात में किसी प्रकार की अव्यवस्था या खतरा न उत्पन्न हो.

ईरान का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल के महीनों में क्षेत्र में तनाव चरम पर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने घोषणा की थी कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने की तैयारी कर रहा है. अमेरिका का आरोप था कि ईरान ने फरवरी में हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को कई हफ्तों तक बाधित कर दिया था.

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर सीधा पड़ता है.

विशेषज्ञों का क्या मानना है?  

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को खोलने का निर्णय अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ेगी. हालांकि, स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और भविष्य में किसी भी नए घटनाक्रम से हालात फिर बदल सकते हैं.

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