होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से कैश नहीं, क्रिप्टो में वसूली करेगा ईरान
ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है. ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर क्रिप्टोकरेंसी में टोल वसूलने की नई शर्त रखी है.

मध्य पूर्व में पिछले एक महीने से जारी ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संघर्ष के बीच बुधवार से हालात कुछ हद तक शांत होते दिखाई दिए. पाकिस्तान की पहल पर दोनों देशों ने दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई है. इस फैसले का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा है, क्योंकि अब रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकेगी.
ईरान ने रखी नई शर्त
हालांकि, इस राहत के साथ ईरान ने एक नई शर्त भी रखी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान अब इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की योजना बना रहा है. खास बात यह है कि यह भुगतान पारंपरिक नकदी में नहीं, बल्कि क्रिप्टोकरेंसी के रूप में लिया जाएगा. ईरान ने इसके लिए एक विस्तृत व्यवस्था तैयार कर ली है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचते हुए राजस्व जुटा सके.
ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल निर्यातकों के संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी ने बताया कि सरकार हर गुजरने वाले टैंकर का आकलन करना चाहती है. इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्धविराम की अवधि का उपयोग हथियारों की तस्करी के लिए न किया जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान यह जानना चाहता है कि जलडमरूमध्य से क्या सामान अंदर आ रहा है और क्या बाहर जा रहा है. इस प्रक्रिया के कारण जहाजों को कुछ देरी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन ईरान इसको लेकर किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है.
ईमेल के माध्यम से ईरानी अधिकारियों को देनी होगी जानकारी
नई व्यवस्था के तहत हर जहाज को अपने माल से जुड़ी जानकारी पहले ईमेल के माध्यम से ईरानी अधिकारियों को देनी होगी. इसके बाद उन्हें डिजिटल मुद्रा में देय टोल की जानकारी दी जाएगी. बताया जा रहा है कि यह शुल्क प्रति बैरल एक डॉलर के हिसाब से तय किया गया है, जबकि खाली टैंकरों को बिना किसी शुल्क के गुजरने की अनुमति दी जाएगी. भुगतान के लिए जहाजों को बहुत कम समय दिया जाएगा, ताकि लेन-देन को ट्रैक करना मुश्किल हो और प्रतिबंधों से बचा जा सके.
युद्धविराम लागू होने के बाद बुधवार को दो जहाजों ने सफलतापूर्वक इस मार्ग को पार भी किया. समुद्री निगरानी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, एक ग्रीक स्वामित्व वाला बल्क कैरियर और लाइबेरिया के झंडे वाला एक अन्य पोत इस रास्ते से गुजरे. इस समझौते के चलते फारस की खाड़ी में फंसे सैकड़ों जहाजों के लिए रास्ता साफ हो गया है.
इस बीच, वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी भी सतर्क रुख अपना रही हैं. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई कंपनियों ने फिलहाल अपनी सेवाओं में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.


