ट्रंप की दया या चाल? अमेरिकी रक्षा सचिव ने ईरान के साथ युद्धविराम के बाद किया प्रेस ब्रीफिंग, राष्ट्रपति को बताया इतिहास रचने वाला

अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति के बाद पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग की. इस दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने युद्ध में निर्णायक जीत हासिल की है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनने के कुछ घंटे बाद अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग की. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिकी सेना ने युद्ध में निर्णायक जीत हासिल की है. हेगसेथ के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आखिरी समय के फैसलों ने पूरी स्थिति बदल दी और इतिहास रच दिया.

हेगसेथ ने कहा कि युद्धविराम से पहले अमेरिकी बलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को बुरी तरह कमजोर कर दिया था. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की इस बढ़त ने बातचीत में मजबूत स्थिति बनाई.

'ईरान का भविष्य हमारे हाथों में': हेगसेथ 

अपने बयान में रक्षा सचिव ने जोर देकर कहा, "ईरान का भविष्य हमारे हाथों में है." उन्होंने बताया कि युद्धविराम के बावजूद अमेरिका के पास रणनीतिक और सैन्य श्रेष्ठता बरकरार है. हेगसेथ का कहना था कि अमेरिकी सेनाओं ने युद्धक्षेत्र में ऐसी जीत दर्ज की, जिससे प्रशासन को आत्मविश्वास मिला.

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा. युद्धविराम की शर्तें अमेरिका की सुरक्षा जरूरतों के अनुकूल है. हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका के पास ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नष्ट करने के विकल्प थे, लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प ने संयम दिखाया.

ट्रंप की 'दया' और नई चेतावनी

रक्षा सचिव ने बताया कि ट्रंप ने युद्ध रोककर राजनयिक रास्ता चुना, जिसे उन्होंने दया का फैसला बताया. उन्होंने कहा, "ट्रंप ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकते थे, लेकिन उन्होंने संयम बरता."

हेगसेथ ने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम नहीं सौंपता, तो अमेरिका दोबारा हमला कर सकता है. उन्होंने कहा कि ईरान इसे स्वेच्छा से दे देगा, वरना पिछले हमलों की तरह परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है.उन्होंने आगे कहा, "हम इस विकल्प को बनाए रखते हैं".

वैश्विक प्रतिक्रियाएं और आगे की चुनौतियां

युद्धविराम की घोषणा के बाद दुनिया भर में चर्चा तेज हो गई है. हेगसेथ के बयान से साफ है कि अमेरिका इस समझौते को अपनी जीत मान रहा है. हालांकि, दोनों तरफ से विश्वास की कमी बनी हुई है.

ऐसा माना जा रहा है कि ये दो सप्ताह का युद्धविराम स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम हो सकता है, लेकिन ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगानी होगी. ट्रंप प्रशासन का रुख सख्त है और कोई भी उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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