इस्लामाबाद पहुंचा ईरान का प्रतिनिधिमंडल, अमेरिका के साथ शांति वार्ता से पहले रखी ये शर्त

इस्लामाबाद में होने वाली ईरान-अमेरिका शांति वार्ता से पहले ही माहौल तनावपूर्ण हो गया है. दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं, जिससे इस अहम बातचीत के नतीजों को लेकर अनिश्चितता और भी बढ़ गई है.

Shraddha Mishra

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिक गई हैं, जहां ईरान और अमेरिका के बीच अहम शांति वार्ता होने वाली है. इस महत्वपूर्ण बातचीत से पहले ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है, जिससे कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है और उम्मीद जताई है कि सभी पक्ष सकारात्मक तरीके से बातचीत करेंगे.

ईरानी मीडिया के अनुसार, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचा. इस टीम में देश के कई बड़े राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक अधिकारी शामिल हैं. हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका उसकी कुछ तय शर्तों को मानने के लिए तैयार होगा.

प्रतिनिधिमंडल में हैं कौन-कौन शामिल

इस प्रतिनिधिमंडल में कई अहम चेहरे शामिल हैं, जो इस बातचीत को खास बनाते हैं. इनमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, राष्ट्रीय रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदीन, केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनसेर हेममती और पूर्व आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद बगेर ज़ोलघाद्र शामिल हैं. इसके अलावा ईरान की संसद के कई सदस्य भी इस टीम का हिस्सा हैं. 

वार्ता से पहले ही रखी गईं कड़ी शर्तें

ईरान ने इस वार्ता को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. तेहरान का कहना है कि बातचीत शुरू करने से पहले कुछ जरूरी मुद्दों पर सहमति बननी चाहिए. इनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और लेबनान की स्थिति जैसे विषय शामिल हैं. ईरान ने यह भी कहा है कि किसी भी युद्धविराम में लेबनान को शामिल किया जाना चाहिए, जहां इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है. साथ ही, ईरान ने अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस पाने की मांग भी दोहराई है.

अमेरिकी टीम भी रवाना, लेकिन माहौल में संदेह

दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भी इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुका है. इस टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे अहम नाम शामिल हैं. हालांकि, दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है. 

हाल ही में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अस्थायी युद्धविराम का उल्लंघन करने के आरोप लगाए हैं, जिससे वार्ता की सफलता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि इस बैठक से तुरंत कोई बड़ा नतीजा निकलना मुश्किल हो सकता है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.

लेबनान और क्षेत्रीय संघर्ष बना बड़ी चुनौती

ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर युद्धविराम होता है, तो उसमें लेबनान को भी शामिल करना होगा. वहीं इज़राइल ने शुरुआत में इसे मानने से इनकार किया और हाल ही में हमलों को तेज भी किया, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने इज़राइल से हमले कम करने की अपील की है, और आगे की वार्ता के लिए कुछ सहमति भी बनती नजर आ रही है.

ईरान और अमेरिका के बीच कई अहम मुद्दों पर अभी भी बड़ा अंतर है. ईरान ने अपने प्रस्ताव में आर्थिक प्रतिबंध हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार को मान्यता देने की मांग की है. वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, मिसाइल क्षमताओं को कम करे और क्षेत्रीय सहयोगियों को समर्थन देना बंद करे. इसके अलावा, अमेरिका अपने नागरिकों की रिहाई का मुद्दा भी उठा सकता है.

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