ईरानी स्पीकर मिनाब के शहीद बच्चों की तस्वीरें लेकर इस्लामाबाद पहुंचे, शांति वार्ता के लिए भरी उड़ान

इस्लामाबाद पहुंचते ही ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ के प्लेन की एक तस्वीर ने अमेरिका-ईरान वार्ता का पूरा माहौल बदल दिया. प्लेन की खाली सीटों पर मिनाब स्कूल हमले में शहीद हुए बच्चों की तस्वीरें और उनके सामान रखे थे, जो ईरान की मजबूत और भावुक स्थिति साफ दिखा रहे थे.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

इस्लामाबाद पहुंचने वाले ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ के प्लेन की एक तस्वीर ने अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली अहम वार्ता का माहौल पूरी तरह तय कर दिया है. प्लेन के अंदर खाली सीटों पर मिनाब स्कूल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें और उनके सामान रखे गए थे, जो ईरान की मजबूत स्थिति को साफ दर्शा रहे हैं. वार्ता शुरू होने से ठीक पहले यह इशारा ईरान के रुख को और सख्त बना रहा है, जबकि दोनों पक्षों के बीच गहरी अविश्वास की दीवार खड़ी है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही ये बातचीत युद्धविराम को स्थायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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गालिबाफ का सतर्क बयान

इस्लामाबाद पहुंचने पर मोहम्मद गालिबाफ ने सतर्क स्वर में कहा कि तेहरान अच्छे इरादों के साथ वार्ता में शामिल हो रहा है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं है. दुर्भाग्यवश, अमेरिकियों के साथ बातचीत करने का हमारा अनुभव हमेशा विफलता और अनुबंध उल्लंघन में ही समाप्त हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि पिछले दौर की बातचीत में भी ईरान पर हमले हुए, जिन्हें वे समझौते का उल्लंघन मानते हैं. 

आगामी वार्ताओं में, यदि अमेरिकी पक्ष वास्तविक समझौता करने और ईरानी लोगों के अधिकारों को प्रदान करने के लिए तैयार है, तो उन्हें समझौता करने के लिए हमारी तत्परता भी दिखाई देगी. गालिबाफ ने स्पष्ट किया. उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत को धोखे के लिए इस्तेमाल किया गया तो ईरान सख्त जवाब देगा.

अमेरिका ने खुला हाथ बढ़ाया लेकिन चेतावनी भी दी

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद रवाना होने से पहले कहा कि अगर ईरानी पक्ष ईमानदारी से बातचीत करना चाहता है तो वाशिंगटन भी तैयार है. यदि ईरानी सद्भावनापूर्वक बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से खुले हाथ बढ़ाने को तैयार हैं.  

हालांकि उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, अगर वे हमें बेवकूफ बनाने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि बातचीत करने वाली टीम इतनी ग्रहणशील नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी दी कि वह अपनी स्थिति को ज्यादा आंक रहा है.

इस्लामाबाद पहुंचे दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल

पाकिस्तान, तुर्किये, चीन, सऊदी अरब और मिस्र की मध्यस्थता से दो हफ्ते पहले बने नाजुक युद्धविराम के बाद इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय वार्ता शुरू हो रही है. ईरानी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं. अमेरिकी पक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं. दोनों पक्ष अस्थायी युद्धविराम को स्थायी समझौते में बदलने पर चर्चा करेंगे.

युद्ध की पृष्ठभूमि ने बढ़ाई वार्ता की अहमियत

लगभग छह हफ्ते तक चले इस युद्ध ने ईरान और लेबनान में व्यापक तबाही मचाई है. हजारों मौतें हुई हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर गंभीर असर पड़ा है. वार्ता के केंद्र में हार्मूज की खाड़ी है, जहां ईरान ने शिपिंग पर दबाव बनाए रखा है. तेहरान कह रहा है कि वह अपनी वैध मांगों से पीछे नहीं हटेगा. वहीं इजराइल दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमले जारी रखे हुए है. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि सैन्य लक्ष्य अभी पूरे नहीं हुए हैं.

नाजुक कूटनीति और युद्ध की हकीकत

इस्लामाबाद वार्ता ऐसे समय हो रही है जब युद्धविराम की व्याख्या को लेकर दोनों पक्षों में गहरे मतभेद हैं. प्रतिनिधिमंडल पहुंचने के बावजूद अविश्वास बना हुआ है. गालिबाफ द्वारा प्लेन में दिखाई गई तस्वीरें इसी संघर्षपूर्ण माहौल को दर्शाती हैं, जो औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले कूटनीति को प्रभावित कर रही हैं.

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