अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए इस्लामाबाद बना संभावित मंच, मध्यस्थता में जुटे कई देश

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब इस्लामाबाद संभावित वार्ता स्थल बनकर उभरा है. मध्यस्थ देशों की सक्रियता के बीच दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं और अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद संभावित वार्ता स्थल के रूप में उभरकर सामने आई है. दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की संभावनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष को सुलझाने के प्रयास अब एक नए मोड़ पर पहुंच गए हैं. इजरायली अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस सप्ताह के अंत तक इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच अहम बैठक हो सकती है. यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ "सकारात्मक" वार्ता के बाद ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने की घोषणा की थी.

पर्दे के पीछे सक्रिय मध्यस्थ देश

रॉयटर्स और एक्सियोस संवाददाता बराक रविद के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा रहे हैं. ये देश दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं.

एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने बताया कि इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों की बैठक कराने के लिए "संपर्क जारी हैं".

अमेरिकी प्रतिनिधित्व और इजरायल की प्रतिक्रिया

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस संभावित वार्ता में अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं. हालांकि, इजरायल इन मध्यस्थता प्रयासों से अवगत है, लेकिन ट्रम्प के हालिया बयानों से वह हैरान नजर आया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि कई मुद्दों पर पहले ही सहमति बन चुकी है.

पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीति

इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से फोन पर बातचीत की और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों में सहयोग का आश्वासन दिया. पिछले एक महीने में दोनों देशों के बीच कई बार संपर्क हुआ है, जिसमें रमजान और ईद के दौरान भी बातचीत शामिल रही.

इसके अलावा, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी ईरानी राष्ट्रपति से चर्चा की है. फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी बात की.

गुप्त वार्ताओं में आई तेजी

मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ अलग-अलग दौर की बातचीत की है.

इजरायली मीडिया के अनुसार, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ से भी चर्चा की है, जो मौजूदा संघर्ष में एक अहम निर्णयकर्ता के रूप में उभरे हैं.

एक सूत्र ने एक्सियोस को बताया कि, "मध्यस्थता जारी है और प्रगति कर रही है," और इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना और लंबित मुद्दों का समाधान निकालना है.

बातचीत पर मतभेद

जहां एक ओर डोनाल्ड ट्रम्प ने बातचीत में प्रगति के संकेत दिए हैं, वहीं ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है.

ट्रम्प ने कहा, "हमारी बहुत ही मजबूत बातचीत हुई है और हम कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमत हुए हैं." उन्होंने आगे कहा कि समझौता जल्द हो सकता है और कूटनीति को मौका देने के लिए सैन्य कार्रवाई को पांच दिनों के लिए रोका गया है. उन्होंने कहा, "हम पांच दिनों का समय दे रहे हैं और देखेंगे कि यह कैसा रहता है. अगर यह ठीक रहा, तो हम इस मामले को सुलझा लेंगे. अन्यथा, हम लगातार बमबारी करते रहेंगे."

साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने उनसे बातचीत के लिए संपर्क किया था.

हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन सभी दावों को नकारते हुए कहा है कि पिछले 24 दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है.

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