पाकिस्तान में चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती, इस्लामाबाद किले में तब्दील, US-ईरान वार्ता से पहले हाई अलर्ट
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले कड़ी सुरक्षा के बीच शहर को किले में तब्दील कर दिया गया है और हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. यह वार्ता युद्धविराम को मजबूत करने और होर्मुज़ मार्ग खोलने जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है.

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित अहम शांति वार्ता से पहले सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है. पूरे शहर को लगभग किले में तब्दील कर दिया गया है. प्रशासन ने 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है और खासकर रेड जोन की ओर जाने वाली सड़कों को पूरी तरह सील कर दिया गया है, जहां सरकारी दफ्तर और महत्वपूर्ण इमारतें स्थित हैं.
सरकारी दफ्तरों में दो दिन की छुट्टी घोषित
सुरक्षा के मद्देनजर स्कूलों, कॉलेजों और कई सरकारी दफ्तरों में दो दिन की छुट्टी घोषित की गई है, जबकि शहरभर में कई जगह चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान को आशंका है कि इज़रायल इस वार्ता में व्यवधान डाल सकता है, जिसके चलते ये कड़े कदम उठाए गए हैं. स्थिति पर नजर रखने के लिए गृह मंत्रालय में एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं, वहीं प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सख्त निगरानी रखी जा रही है. गश्ती दलों और विशेष यूनिट्स को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है.
शांति वार्ता के आयोजन स्थल के रूप में सेरेना होटल को पूरी तरह से सुरक्षित कर सील कर दिया गया है. यहीं पर अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल ठहरेंगे और बातचीत करेंगे. यह वार्ता पश्चिम एशिया में हाल ही में छह सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक पहल मानी जा रही है, जिसमें हजारों लोगों की जान गई और वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ा.
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अलावा डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ शामिल हैं. दूसरी ओर, ईरान की ओर से संभावित रूप से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची नेतृत्व कर सकते हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.
क्या है बातचीत का उद्देश्य?
इस बातचीत का उद्देश्य संघर्षविराम को मजबूत करना, लेबनान से जुड़े विवादों को सुलझाना और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनाना है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
ईरान ने इस वार्ता के लिए 10-सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें अपने क्षेत्रीय प्रभाव और परमाणु कार्यक्रम के अधिकारों को मान्यता देने की मांग शामिल है. वहीं अमेरिका की ओर से 15 बिंदुओं का जवाबी प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें परमाणु हथियार न रखने और समुद्री मार्ग खोलने पर जोर दिया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस वार्ता का नतीजा न केवल पश्चिम एशिया की राजनीतिक स्थिति तय करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता पर भी गहरा असर डाल सकता है.


